Posts

लोकतंत्र का धर्म

बंद किए जाएंगे सारे सरकारी स्कूल, ताकि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने की मजबूरी हो। फिर जमीन बेचकर पढ़ाओ। ऐसा करने से एक दिन अमीरों के पास सारी जमीनें होंगी। सारे गरीब, जिनकी बस एक ही पूंजी होती है, वह भी खत्म हो जाएगी। देश में अमीरों की चांदी होगी, गरीब खत्म हो जाएंगे। यही सरकार का लक्ष्य है। स्कूल बंद करो, फिर कहो कि अनपढ़ हैं तो नौकरी कैसे मिलेगी। मतलब, एक स्कूल बंद होने से कितनी ही समस्याओं का समाधान हो जाता है—  प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की कमी खत्म, सस्ते टीचरों की कमी खत्म न पढ़ाई का खर्च,  न नौकरी मांगने वालों की भीड़,  न ही सवाल पूछने वाले,  एकमुश्त वोट में कोई अड़ंगा नहीं,  पटरियों पर कुचलने की प्रैक्टिस के लिए नेताओं के बच्चों को भारी भीड़ मिलेगी,  दोस्त उद्योगपतियों के लिए सस्ते मजदूर मिलेंगे,  उल्लू बनाने के लिए आसान टारगेट मिलेंगे, और लगभग सभी समस्याएं खत्म... असल में, देश में राजनेताओं के इस तरह बेलगाम हो जाने का कारण हम ही हैं। हम स्कूल के नाम पर वोट नहीं देते,  हम अस्पताल के नाम पर वोट नहीं देते,  हम सड़क के नाम पर वोट नहीं दे...

खूबसूरत, हसीन, नाज़नीन, कहकशा P305

खूबसूरत, हसीन, नाज़नीन, कहकशा, अब कहो क्या कहें क्या पुकारें तुम्हें, चाँद हो, रात हो, शाम हो, तुम सुबह, आओ पलकों पर अपनी बिठा लें तुम्हें। कहकशाएँ लटों में समेटे हुए, तुम सुनो मेरा पूरा ही संसार हो, तेरा कंगन प्रिय है ब्लैक होल-सा, मुझको खींचे तुम्हीं वो गुरुभार हो, तुमसे दूरी रहे ये तो मुमकिन नहीं, तुम कहो तो गले से लगा लें तुम्हें। चाँद हो, रात हो, शाम हो, तुम सुबह, आओ पलकों पर अपनी बिठा लें तुम्हें। तुम महकती हुई कोई ताज़ा ग़ज़ल, या कविता कोई राधिका नाम की। प्रेम का गीत हो या कोई आरती, रोशनी हो तुम्हीं, कृष्ण के धाम की। तुम मुझे प्रेम का आकर वरदान दो, प्रेम मंत्रों से हम या तो पा लें तुम्हें। चाँद हो, रात हो, शाम हो, तुम सुबह, आओ पलकों पर अपनी बिठा लें तुम्हें। शून्यता से परे तुम किसी राग की, एक मादक मनोहर सी आवाज हो, हो कोई सीप जो, मोतियों से भरी, स्वप्न हो, एक मीठा सा अहसास हो। तुम चले आओ जीवन को पूरा करो, या बताओ कि कैसे बुला लें तुम्हें। चाँद हो, रात हो, शाम हो, तुम सुबह, आओ पलकों पर अपनी बिठा लें तुम्हें। गुरुभार — ग्रैविटी, विराट द्रव्यमान या आकर्षण-केंद्र जिसकी ओर सब स्व...

मोक्ष तजना चाहता हूँ (#304)

अब सफलता के सफर में एक विफलता चाहता हूँ, प्रेम का अक्षय गरल पी मैं अमरता चाहता हूँ। चाहता हूँ जिंदगी की साँझ तक तुझको निहारूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं प्रेम करना चाहता हूँ। हाँ यक़ीनन तुमको पा मैं मोक्ष तजना चाहता हूँ। क्या कहा मुमकिन नहीं है प्रेम में अमरत्व पाना, क्या कहा जलने न देगा प्रेम का दीपक जमाना, पर उम्मीदें भर के मन में, स्वयं को करके समर्पित, बस अनंत चिंगारियों-सा मैं धधकना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं प्रेम करना चाहता हूँ। तुम व्यर्थ ही हो व्यथित कि कैसे फिर पहचान होगी, ये तुम्हारी नील आँखें प्रेम का प्रतिमान होंगी। जन्मों तक मुझको भले ही,  करनी हो तेरी प्रतीक्षा,  मैं तुम्हें पहचानने की एक परीक्षा चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं प्रेम करना चाहता हूँ। ज्ञान और अज्ञान के इस तर्क से मैं तो विफल हूँ, पर तुम्हारे प्रेम के मैं इस धरातल पर अटल हूँ। प्रेम में मुझको नहीं अब देवत्व की अभिलाषा, छोड़ कर मैं हिम तपस्या तुममें रमना चाहता हूँ। मोक्ष को बस त्याग कर मैं प्रेम करना चाहता हूँ। लक्ष्य मेरा सच कहूँ तो हिमशिखर या क्षीर नहीं है, है मेरा मन राधिका-सा तुम बसे ...

सदियाँ बीती जैसे तुमको 303

Image
सदियाँ बीती लगता है तुमको,  देखा था अफसानों में। चमक तुम्हारी पड़ते ही लो,  जान पड़ी मयखानो में। खुशबू अब भी साँसों में है,  पास से बस गुजरी तुम थी, चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानो में। होठों पर तैरी बिजली-सी,  थी मुस्कान कयामत की। मुझको तेरा मिलना जैसे,  ईश्वर की है नियामत-सी। तेरा हाथ लिए हाथों में,  चलना है और थमना है, जीवन में सारी खुशियों की,  तुम जैसे हो जमानत-सी। रहना है अंतिम सांसों तक,  तेरे दिल के खानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानो में। चाल है ऐसी, मौजें बहकें,  नदियाँ सब शरमा जाएँ। ज़ुल्फ़ें जैसे काली घटाएं, मेरे आंगन छा जाएँ।  इस आँचल में बहक गई उस,  हवा का भी अंदाज़ सुनो, सूखी-मुरझाई शाखें भी,  झूम-झूम लहराएँ, गाएँ। हुआ फ़साना हुस्न तुम्हारा,  बिखरा है अफ़सानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानों में। तेरी खुशबू जब भी आती,  मन भोला बहकाती है। तेरी बातों की लय सुनकर,  साँसें ठहर-सी जाती हैं। तेरे पैरों की छम-छम से,  सुंदर कोई भी साज नही...

था बहक गया जिसे देख कर (302)

था बहक गया जिसे देख कर, ये जहान शायद वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। यहाँ रंग कितने गरीब हैं, इन्हें है चमक की तलाश-सी। है उजड़ गई है बिखर गई, जैसे रोशनी भी बहार की चलो, फिर से रंग दो जहान ये, कई रंग लेकर खड़ी हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। तुम्हें मुस्कुराने की लत सी है, मैं हूँ सूखी डाली बहार में। तुझे देखना है नशा अजब, बड़ा चैन है तेरे प्यार में, मुझे अपना कहकर बुला जरा, मेरे साथ इतना लड़ी हो तुम, हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। मेरी साँसों में तेरी आस है,  मेरी आसों में तेरी प्यास है। मेरे पास होके भी दूर तुम, तू ही दूर होके भी पास है, सुनो जिंदगी में खिला हुआ, कोई बाग कोई कली हो तुम! हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। क्या ये इश्क का एक खिताब है, तेरे पलकों का जो हिज़ाब है? तुझे चाहना है जूनून-सा, तेरी जिंदगी को तलाश है, मैं हूँ गलतियों की किताब एक, जो सही है इसमें वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब खुद, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।

मात (301)

यूँ निगाह फेरी है आपने,  अब न रात होगी रात भर,  मुझे दिन निकलने से क्या भला,  जो न बात होगी बात भर। मुझे इश्क करने से रोकना, किसी नाक का ये सवाल था, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। ये जहान सारा तुला रहा,  उसे बदगुमा सा ख्याल था। तुझे चाहने में सुकून था,  तुझे पा के दिल ये निहाल था, मेरे इश्क पर वो फब्तियां,  रही प्यार का हासिल सुनो, तुझे खो के कुछ भी बचा नहीं,  तुझे पा के दिल ये बबाल था। सिला अपनो पर ही यकीन का,  अब तो घात होगी घात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। तेरी प्यास है तेरी आस है,  पर न साथ तेरा साथ है, मुझे है पता तू न आयेगा,  तभी दिल मेरा ये उदास है सुनो इश्क की ये बंदगी,  जैसे बन गई है खुदकुशी,  मेरी रूह तुझसे जुड़ी हुई,  मेरे मन को तेरी तलाश है। सुनो तेरे दिए इस दर्द से,  बस बात होगी रात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। वही धूप है वही चाँदनी,  तेरा साथ था तो बहार थी, वो जो पल बिताए थे साथ में,  वही जिंदगी का सार थी। तुझे देख...

हम दोनों एक-दूसरे से पूर्ण (300)

हम दोनों भले ही अलग आयामों में जन्मे हों, पर किसी ब्रह्माण्डी कोड में बहुत पहले ही— किसी बाइनरी स्क्रिप्ट के 0 और 1 में हम लिख दिए गए थे। तुमसे मिले बिना मैं, चल तो रहा था— पर ठीक वैसे जैसे कोई डिवाइस अनंत काल से सेफ़ मोड में हो। अधूरा, संकुचित, फीके रंगों-सा, बस अपनी ही स्क्रीन में उलझा हुआ। और जब तुम आई— तो लगा जैसे ज़िंदगी पहली बार फुल-बूट हुई हो। सारे ड्राइवर्स, सारे अपग्रेड, अपने आप इंस्टॉल हो गए। मानो जीवन ने पहली बार हाई-रेज़ोल्यूशन में खुद को देखा हो। कभी कभी लगता है कि, हम दोनों एक दूसरे के बिना क्या हैं, शायद कुछ भी नहीं, बिल्कुल निरर्थक। अगर मैं मदरबोर्ड हूँ— तो तुम मेरी नसों में दौड़ती लेटेस्ट प्रोसेसर की क्लॉक-स्पीड, जो मेरे हर सेकंड को अपने प्रेम की ताल देती है। अगर मैं SMPS हूँ—तो तुम वह पावर-सप्लाई, जो मेरी हर वायर, हर सॉकेट में नई उम्मीद और रौशनी भर देती हो। अगर मैं CPU हूँ—तो तुम मेरा हीट-सिंक, जिसके बिना ज़रा सा लोड बढ़े तो मैं मोम की तरह पिघल जाऊँ। अगर मैं हार्ड डिस्क हूँ—तो तुम प्रेम का वह अमर डेटा, जो सदियों बाद भी, बिना करप्ट हुए, वैसा का वैसा पढ़ा जा सकेगा। अगर ...

सुबह सुबह जो छू लेते हो...

Image
सुबह-सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को। नयन ये बरबस झुक जाते हैं, लब-लब पर आ रुक जाते हैं, लहरा उठता है मन का सागर, पा गालों पर लाली को। स्वर्ग हुई है जीवन बगिया, पावन मन का कोना-कोना, तेरा होना मुझको भाया, तुम ही अब जीवन का गहना, आस यही कि भूल के खुद को, मन में तेरे छुप जाऊं, प्रीतम मेरे थाम लो आकर, मन की तुम लाचारी को, सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को, टूट गई सब लाज की गाठें, सदियों से थीं प्यासी रातें, मिलन के इस आवेश में भूली, करनी तुमसे कितनी बातें, राज सभी खुलते जीवन के, राग नए बजते हैं मन के, तुम ही कह दो थाम लूं कैसे, इस यौवन मतवाली को। सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को। प्रथम मिलन मधुमास की रातें, इतनी जीवन की सौगातें, तुम को पाया अब पाना क्या, सब पूरी मन की फरियादें, सब मधुमय है जीवन लय है, अमर हमारा ये परिणय है, तुमसे मेरा तन मन रोशन, भूल ही बैठी दीवाली को। सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन क...

रूह का पासवर्ड 299

Image
ये विरह नहीं, ये एक स्क्रीन फ़्रीज़ है, जहाँ मैं हूँ जहाँ तुम, पर टच में ग्लिच है। रिश्ते की ये चैट हिस्ट्री अब भी खुली पड़ी, किसी इमोजी पर मेरा न, नाम स्टिच है। तेरे चेहरे की वो साफ़ HD क्वालिटी, मेरी पलकें आज भी ऑटो-लोड कर लेती। पर जब आवाज़ सुनने की आती है बारी, तो हर बार वही नो-सिग्नल वार्निंग देती। तुम जैसे हो कोई इनबिल्ट एप्लीकेशन, जिसे डिलीट करने का ऑप्शन नहीं होता। मेरा दिल तुम्हारे पुराने वर्ज़न पर अटका हुआ है, तभी नए ज़माने का मैं कोई फोन नहीं लेता। ये दूरी नहीं—ये है वक़्त का फ़ायरवॉल, ये वायरस नहीं, खिड़की का है न्यू इंटरफेस। और इंतज़ार है उस यूनिक पासवर्ड का, जो तुम्हारी रूह के कीबोर्ड पर है कहीं ट्रेस। लेकिन, मेरी हार्ड डिस्क के हर एमबी में, एमबी ही नहीं—सुनो, हर एक बिट में। बस तुम्हारी आँखों का बाइनरी कोड लिखा है, तुम्हारी मुस्कुराहट बहती है मेरे हर सर्किट में। ये सपने नहीं—प्यार की बैकअप फ़ाइलें हैं, जहाँ हर रात डाउनलोड होता है तेरा ही नाम। सुबह आँख खुलते ही रोज एक एरर आता, क्योंकि दिल में अब भी है तेरा आउटडेटेड प्रोग्राम। मेरी रातें तेरी वॉइस-नोट की तरह हैं— बस एक लूप म...

तो कोई बात हो 298

मेरी पूछ का जो जवाब हो, तो कोई बात हो उस बात में। कोई राज, सच में जो राज हो, तो कोई बात हो उस राज में। मेरे रतजगों के हिसाब की, कोई हो कहानी तो कह भी दो। कोई मन जो चूं के निढाल हो तो कोई बात हो उस बात में। तुम तो कह रही हो, जग कही, कभी मन कही पर, ध्यान दो, ये जमाना कुछ तो कहेगा ही, इसे जिंदगी पर न लाद दो। कोई बात ऐसी सुनो कभी, तुम न साथ दो उस बात में। जो जला दे बुझती राख को,  वहीं फूंक हो अंगार में। मैं तो थाम लूँ तेरी हर थकन,  तुझे फिर हँसी में ढाल दूँ, तू जो चाह ले, मैं वक़्त से,  तेरे नाम की फिर मिसाल दूँ। कभी हार कर भी न हारना,  बस ये याद हो हर हार में। तुम जो टूट कर भी लड़ सको,  तो कोई बात हो उस रार में।... तुम जो हारे दिल को थाम लो,  तो बहार होगी आज ही, तुम यकीन करके कहो सुबह,  तो उगेगा सूरज रात ही। जो उम्मीद की एक लकीर हो,  वो ही साथ हो बस साथ में। थके पाँव फिर भी सफ़र रहे,  तो कोई बात हो उस चाल में। तेरी एक हँसी में अटक गई, तेरी जुल्फों में है भटक गई तेरी आँखों में कभी डूबी तो,  सारे जग को आँखें खटक गईं। ये नजर मिले तो ये जग जले,...

ये हकीकत ही है, रात भर ख्वाब में 297

ये हकीकत ही है, रात भर ख्वाब में, तुमको आना ही है, तुमको जाना ही है, प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। तुम सुनो तो बहुत तेज हैं धड़कनें, प्रीत में बस जमाने की हैं अड़चनें, मन के विश्वास पर तुम यकीन तो करो दूर होंगी मोहब्बत की सब उलझनें।  दहशतें कुछ भी हों, इश्क़ में पर सुनो प्रेम का गीत हमको तो गाना ही हैं। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। झूठ सच से भरी एक कहानी नहीं, मीरा यूं ही बनी थी दीवानी नहीं, प्रेम से ही सुनो सारी सृष्टि ये है, प्रेम के बिन तो कोई कहानी नहीं चाहे कुछ भी कहो, पर जहाँ के लिए इश्क सच हो मगर, एक फसाना ही है। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। जुल्फें बिखरी हैं, इनको सँवारो जरा, मुझको मझधार से तुम उबारो जरा, मन के आंगन में बिखरा अंधेरा घना, चाँद बन कर के अब तुम पधारो जरा मैं तो भटका हूँ सदियों, तेरी चाह में, तेरा दिल मेरा अंतिम ठिकाना ही है। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। दूर बरसों रहे, पास आओ प्रिये, न मोहब्बत में इतना, स...

मिली-मिली-सी मिली नहीं हो 296

मिली-मिली-सी मिली नहीं हो, जुदा-जुदा-सी जुदा नहीं तुम, हो छा रही तुम गगन धरा पर ख़ुदा-ख़ुदा-सी, ख़ुदा नहीं तुम। ये बात समझा नहीं जमाना, तुम्हारा मिलना कमाल-सा है, खुदा ने जैसे मरु धरा पर, रचा नया एक जमाल-सा है खिला दिया है ये बाग दिल का, घटा-घटा-सी, घटा नहीं तुम हो छा रही तुम गगन धरा पर, ख़ुदा-ख़ुदा-सी, ख़ुदा नहीं तुम। किसी सफर में किसी डगर में, कोई भी रस्ता, जुदा कहाँ है, तुम्हीं से चलकर, तुम्हीं पर आना, मेरा तुम्हीं पर थमा जहान है। तुम्हीं में मिलना है लक्ष्य अंतिम, धरा-धरा-सी धरा नहीं तुम। हो छा रही तुम गगन धरा पर, ख़ुदा-ख़ुदा-सी, ख़ुदा नहीं तुम। है चाह ऐसी लगी तुम्हारी,  दीवाना ये दिल बहक रहा है अथाह तुमसे ले प्रेम मन में, ये मन का पंक्षी चहक रहा है मुझे पतंगा बना दिया पर,  शमा-शमा-सी, शमा नहीं तुम। हो छा रही तुम गगन धरा पर, ख़ुदा-ख़ुदा-सी, ख़ुदा नहीं तुम। ये मेघ उड़ते महल हैं जैसे, तेरी कहानी छुपा रहे हैं, नयन तुम्हारे ये बनके बिजली,  दीवानों को बस मिटा रहे हैं उड़ा दी सारी है नींद जग की बला-बला-सी, बला नहीं तुम। हो छा रही तुम गगन धरा पर, ख़ुदा-ख़ुदा-सी, ख़ुदा नहीं त...

ये चाँद लंबी आहें भर रहा है क्यों (295)

ये चाँद लंबी आहें भर रहा है क्यों? देख कर तुम्हें ये जल रहा है क्यों? मिल रहे हज़ारों लोग जिंदगी की राह में, ये दिल मेरा तुम्हीं पर अड़ रहा है क्यों?.... देखिए अजीब है, अजीब है, अजीब है, अजनबी से तुम तुम्हीं से बंध गया नसीब है, खिल रहे हैं नव कंवल, मन के सूखे ताल में, छप रहे हैं शब्द नवल मन की इस किताब में, हो रही हैं बारिशें, ये मन भटक रहा है क्यों? ये दिल मेरा तुम्हीं पर अड़ रहा है क्यों?.... बन रही है बात फिर बातों से कहानियाँ, ठन रही है रार और लड़ रही जवानियाँ। प्रेम में लिया जो थाम हाथ कैसे छोड़ दें, बात जो कही कभी वो बात कैसे मोड़ दें। प्रेम ही खुदा कहो तो, जग उलझ रहा है क्यों? ये दिल मेरा तुम्हीं पर अड़ रहा है क्यों?.... चाँदनी है रात बात चाँद की ही चल रही, उमंग दिल में ज्वार-सी, चढ़ रही उतर रही, बह रही हैं रश्मियाँ सिंधु इस विशाल में  बहक रहा है मन मेरा, तुमको पाकर साथ में, साथ देख तुमको मेरे जग ये जल रहा है क्यों? ये दिल मेरा तुम्हीं पर अड़ रहा है क्यों?....

यकीं है मुझको 294

सुरमई शाम ग़ज़ब ढ़ाएगी, यकीं है मुझको, बात ये याद बहुत आएगी, यकीं है मुझको। जिसपे करता हूँ उजड़ती है यकीं की खेती, तू भी ये रीत निभाएगी, यकीं है मुझको। सुन जरा वक्त बुरा आने दे फिर यही होगा, तू मुझे छोड़ के जाएगी यकीं है मुझको। ये जहान सच है, फरेबी है, मनमीत-सा है? रात हर राज बतायेगी, यकीं है मुझको। मेरा हर सच इस जमाने में रुस्वा होगा, झूठ हर बात कही जाएगी, यकीं है मुझको। उसको हर हाल में बेशक चले आना होगा, जब मेरी आह बुलाएगी, यकीं है मुझको। कोई हो शेख-नमाज़ी या पंडित-साधु, मौत ये रहम न खाएगी, यकीन है मुझको। वो तो कर्मों के तराजू पर ही तोलेगा मुझे, जात कोई काम न आएगी, यकीं है मुझको।

मैं अधूरा हो गया हूँ (293)

तुम हो छोले, मैं भटूरा हो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ, बिन तुम्हारे हो गया आधा अधूरा तुम हो चटनी मैं पकौड़ा हो गया हूँ। कल सुनो, मैं भी चलूँगा साथ तेरे, हाथ में देना सजनिया, हाथ मेरे, दूर तक चलना, जहाँ कोई नहीं हो, कल की छुट्टी, मैं रहूँगा साथ तेरे। हाँ वही, खट्टे-से पानी की वो पूड़ी, जिसके बिन शामें तुम्हारी हैं अधूरी। और तीखा और खट्टे की दुहाई, मुझको भी भाने लगी है वो खटाई, हाँ तुम्हीं-सा मैं तो थोड़ा हो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ। मोमो की खुशबू में डूबी तुम खड़ी थीं, और होठों पर लगी चटनी तुम्हारी, खो गया था दिल, तुम्हें तो याद है न, जब मिली थीं तुम मुझे वो शाम प्यारी, आज तक भूला नहीं मन साथ तेरा, जब लिया हाथों में तुमने हाथ मेरा। याद है मुझको वो तेरी आँख का रंग, तेज मिर्च से था बदला गाल का रंग, मोमो की चटनी में थोड़ा खो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ। बाग में हैं आज कल चर्चे तुम्हारे, जल रही हैं देख कर तुमको बहारें, इन निगाहों में छुपा कर बिजलियाँ तुम, कर रही हो पास आने के इशारे, नागिनों से पाश में ले खींचती हो, नयनों को तुम रात करके मींचती हो।...

गीत कोई तुम गाओ...

गीत कोई तुम गाओ, और इस दिल को बहलाओ,  सब भूलूँ जगत की रीते, तुम भी जग को बिसराओ।  मैं दीप करूँ तन-मन को, तुम दीप शिखा बन कर के,  पतझड़-सा है ये जीवन, तुम फूलों-सा महकाओ। है चंद्रिका सी शीतल, ये रातें खूब जलाएँ,  तुमसे दूर ओ साजनी, रजनीगन्धा ना भाये,  बुझता उम्मीद का दीपक, इतनी लंबी है दूरी, तुम बनकर घटा सुहानी, बस प्रेम सुधा बरसाओ,  मैं दीप करूँ तन-मन को, तुम दीप शिखा बन जाओ। जो जन्मों की है दूरी, तो जीकर क्या है करना, तुम बिन ओ मेरे साजन, मुश्किल बहुत है मरना,  है जीवन ये एकांकी, ढलते सूरज की छाया,  तुम आ जाओ जीवन में, एक नया सवेरा लाओ।  मैं दीप करूँ तन-मन को, तुम दीप शिखा बन जाओ। दिल कब से ढूँढ रहा है, कोई मार्ग तुझे पाने का,  कहीं ऐसा न हो जाए, हो वक्त मेरे जाने का,  मैं दुनिया छोड़ ना जाऊँ, तुझसे मिलने से पहले,  तुम जल्दी से आकर बस, मुझको अपना कर जाओ।  मैं दीप करूँ, तन-मन को, तुम दीप शिखा बन जाओ।

प्रेम से ज्यादा पैसे का 292

प्रेम से ज्यादा पैसे का जीवन पर अधिकार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार, लेन देन ही बन गई जीवन का आधार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार। साल महीने छह हुए होती है अब ऊब, जन्मों की कसमें कभी खाई मिलकर खूब, अब तो जीवन लग रहा हर पल है बेज़ार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार। मंजिल को जो साथ में चले खींच नव लीक, सुगम हुआ जब रास्ता अहम बना मनमीत, लघुता के अभिमान का अम्बर-सा विस्तार  है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार। हाँ में हाँ कहते रहो तब तक सबका साथ, मीत बनेंगे खास सब अद्भुत-सा अहसास, ज्यों मतलब पूरा हुआ बनी दोस्ती भार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार। इस दुनिया का खेल है भावों से बस खेलना, उजियाले का पंथ दिखा अँधियारे में ठेलना, मृदुल भावना तोलते जैसे हो व्यापार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार। अपनी करनी की नहीं पर करनी की नाप झूठा सबको कह रहे झूठ को अपनी ढांप, सागर मध्य उतारते, कह खुद को लाचार, है मूरख जो ढूँढता इस दुनिया में प्यार।

सुला दे मुझको 291

तेरे होठों की ये मिठास चखा दे मुझको, अपनी प्याली से एक घूंट पिला दे मुझको। आज की रात ये आई है बड़ी मुद्दत में, अपने पहलू में फिर आज सुला दे मुझको। फ़ासला ही अगर रखना है तुझे मुझसे, इससे अच्छा तो निगाहों से मिटा दे मुझको। इन नजारों में नहीं, तुझमें कशिश है जो सनम, मान जा दिल में कहीं अपने बसा ले मुझको सुन कोई राज छुपाया ही नही तुझसे  कभी कहना चाहे जो तेरा दिल वो बता दे मुझको। थक गया हूँ मैं सपनों का वजन ढ़ोते-ढ़ोते, ख्वाब जिसमें न हो नींद ऐसी सुला दे मुझको।

अरमानों पर पानी है 290

क्या हुआ जो दिल के सारे अरमानों पर पानी है, दिल ने तेरे इश्क से मेरे, रार ये कैसी ठानी है, ऐसे तूने अरमानों को खत्म किया है सीने में, दुनिया कहती तुझपर मरना, मेरी बस नादानी है। दुनिया के कुछ कह देने से, दिल बोलो कब डरता है, इश्क तो वो है सदियों से जो, जूती पर जग रखता है, जग के सारे समझाने से, कैसे माने दिल मेरा, दुनिया को ठुकरा देने की, जब इस दिल ने ठानी है। रोज चले आते समझाने, दिल ने कब कुछ पूछा है, डर लगता है जग को सारे, ख्वाब जो मेरा टूटा है, जग को डर है लीक नई फिर, इश्क मेरा ये गढ़ लेगा, खुद की लाज बचाने को ही, जग की आनी-जानी है। तुम भी सुन लो सदियों तक, तुमको तो आना होगा, प्रीत के मेरे अवशेषों पर जग को झुक जाना होगा, द्रोह सुनो मेरा अविचल है, जग की कुंठित रीतों से, जो मन को मंजूर नहीं वो, बात कब दिल ने मानी है। आज कहो तो जग को जाकर, सारा हाल बता दूँ फिर, तुमसे प्रेम मुझे कितना है, जाकर क्या दिखला दूँ फिर, लेकिन जग से कह देने में, प्रेम को क्या मिल जाएगा, तू न समझा, दुनिया से फिर, कुछ कहना बेमानी है

हर्ष विकंपित हो रही हैं..p 289

हर्ष विकंपित हो रही हैं, मन में लो सारी व्यथाएं  राम तुम आए हो गूंजें, प्रेम से सब दस दिशाएं। हम व्यर्थ का ज्ञान भर मन, तेरा-मेरा कर रहे हैं, राम तुम कर दो कृपा बस, ज्ञान ऐसा भूल जाएं। कुछ नहीं ऐसा जगत में, जिसमे मेरे नाथ न तुम कैसे मानूं आ रहे अब, सदियों तक तुम थे न आए। हम सुनो! अज्ञान को ही, ज्ञान अपना कह रहे हैं, ज्ञान गीता का भुला कर, रच रहे कलि की ऋचाएं। तुम प्रभु जो सोच भर लो, सृष्टि नव निर्माण होगी, क्यों प्रभु अभिमान इतना, घूमता दस सिर उठाए। नारायण तुमको किया है, दूर नर से खेल देखो, खेलती माया महाबली, कैसे मन खुद को बचाए। क्या धरा के पुण्य उदय को, कल्कि तक रुकना पड़ेगा, राम बजरंगी से कह दो, पाप सब मन के मिटाएं।