था बहक गया जिसे देख कर (302)
था बहक गया जिसे देख कर,
ये जहान शायद वही हो तुम।
हो खुदा की जैसे किताब एक,
बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
यहाँ रंग कितने गरीब हैं,
इन्हें है चमक की तलाश-सी।
है उजड़ गई है बिखर गई,
जैसे रोशनी भी बहार की
चलो, फिर से रंग दो जहान ये,
कई रंग लेकर खड़ी हो तुम।
हो खुदा की जैसे किताब एक,
बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
तुम्हें मुस्कुराने की लत सी है,
मैं हूँ सूखी डाली बहार में।
तुझे देखना है नशा अजब,
बड़ा चैन है तेरे प्यार में,
मुझे अपना कहकर बुला जरा,
मेरे साथ इतना लड़ी हो तुम,
हो खुदा की जैसे किताब एक,
बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
मेरी साँसों में तेरी आस है,
मेरी आसों में तेरी प्यास है।
मेरे पास होके भी दूर तुम,
तू ही दूर होके भी पास है,
सुनो जिंदगी में खिला हुआ,
कोई बाग कोई कली हो तुम!
हो खुदा की जैसे किताब एक,
बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
क्या ये इश्क का एक खिताब है,
तेरे पलकों का जो हिज़ाब है?
तुझे चाहना है जूनून-सा,
तेरी जिंदगी को तलाश है,
मैं हूँ गलतियों की किताब एक,
जो सही है इसमें वही हो तुम।
हो खुदा की जैसे किताब खुद,
बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
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