हम दोनों एक-दूसरे से पूर्ण (300)

हम दोनों भले ही अलग आयामों में जन्मे हों,
पर किसी ब्रह्माण्डी कोड में
बहुत पहले ही—
किसी बाइनरी स्क्रिप्ट के
0 और 1 में हम लिख दिए गए थे।

तुमसे मिले बिना मैं
चल तो रहा था—
पर ठीक वैसे जैसे कोई डिवाइस
अनंत काल से सेफ़ मोड में हो।
अधूरा, संकुचित, फीके रंगों-सा,
बस अपनी ही स्क्रीन में उलझा हुआ।

और जब तुम आई—
तो लगा जैसे ज़िंदगी पहली बार
फुल-बूट हुई हो।
सारे ड्राइवर्स, सारे अपग्रेड,
अपने आप इंस्टॉल हो गए।
मानो जीवन ने पहली बार
हाई-रेज़ोल्यूशन में
खुद को देखा हो।

कभी कभी लगता है कि,
हम दोनों एक दूसरे के बिना क्या हैं,
शायद कुछ भी नहीं,
बिल्कुल निरर्थक।
अगर मैं मदरबोर्ड हूँ—
तो तुम मेरी नसों में दौड़ती
लेटेस्ट प्रोसेसर की क्लॉक-स्पीड,
जो मेरे हर सेकंड को
अपने प्रेम की ताल देती है।

अगर मैं SMPS हूँ—
तो तुम वह पावर-सप्लाई,
जो मेरी हर वायर, हर सॉकेट में
नई उम्मीद और रौशनी भर देती हो।

अगर मैं CPU हूँ—
तो तुम मेरा हीट-सिंक,
जिसके बिना ज़रा सा लोड बढ़े
तो मैं मोम की तरह पिघल जाऊँ।

अगर मैं हार्ड डिस्क हूँ—
तो तुम प्रेम का वह अमर डेटा,
जो सदियों बाद भी,
बिना करप्ट हुए,
वैसा का वैसा पढ़ा जा सकेगा।

अगर मैं रैम हूँ,
तो तुम मेरी हाई-बैंडविड्थ,
जिसकी तेज़ी मेरी हर चिंता
एक क्लिक में क्लियर कर देती है।

अगर मैं BIOS हूँ—
तो तुम वह प्राइमरी सेटिंग,
जो मुझे मेरी हर शुरुआत में,
विंडो के अन्नत आकाश तक ले आती हो

अगर मैं ग्राफ़िक्स कार्ड हूँ—
तो तुम रंगों की इनफिनिटी पैलेट,
जिससे मेरी दुनिया
उजली, रंगीन और खूबसूरत होती है।

मैं अगर वायरलेस कार्ड हूँ—
तो तुम वह सिग्नल—
जिससे दूर रहकर भी
हमारी धड़कनें
कनेक्ट रहती हैं।

मैं कीबोर्ड,
तुम माउस का कर्सर—
जहाँ तुम ठहरती हो,
वहीं पर मेरे नए शब्द
जन्म लेते हैं।

मैं स्पीकर,
तुम वह फ्रीक्वेंसी—
जो मेरे बेस में
अपनी भावनाओं का ज्वार
भर देती हो।

मैं टचस्क्रीन,
तुम उँगली का निश्छल स्पर्श—
जिससे कभी कमांड नहीं,
सिर्फ़ भावनाएँ स्वीकार होती हैं।

मैं ब्लूटूथ,
तुम मेरा ऑटो-पेयरिंग डिवाइस—
तुम्हारे पास आते ही
मेरी रेंज बढ़ जाती है
और दुनिया की सारी नॉइज़
ऑटो-केन्सल हो जाती है।

मैं USB-पोर्ट,
तुम पेन-ड्राइव—
बस एक स्पर्श में,
हम अनगिनत यादें, 
ट्रांसफ़र कर लेते हैं।

मैं फिंगरप्रिंट सेंसर,
तुम वह उँगली—
जिसकी गर्माहट मिलते ही
मैं बिना किसी सवाल के
अनलॉक हो जाता हूँ।

मैं ईयरफ़ोन,
तुम धड़कन—
हमारे मिलते ही,
आवाज़ नहीं, अहसास
संवाद बन जाते हैं।

मैं विशाल क्लाउड-स्टोरेज हूँ,
तुम प्रेम की अनंत फाइलें—
जो कभी डिलीट नहीं होतीं।

मैं सर्च-बार,
तुम वह पहला ऑटो सजेशन—
जो टाइप करते ही,
खुद-ब-खुद सामने आ जाता है—
क्योंकि मेरा दिल,
तुम्हें सबसे पहले स्थान पर रखता है।

मैं स्क्रीन-लॉक हूँ और,
तुम मेरी पासवर्ड का स्माइली—
जो किसी और पर नहीं,
सिर्फ़ मुझ पर खुलती है।

मैं नोटिफ़िकेशन,
तुम मोबाइल का वाइब्रेशन—
जिसके आते ही दिल
हल्का-सा काँप जाता है।

मैं वॉल्यूम कंट्रोल का हार्ड बटन,
तो तुम टच-स्लाइड,
जो मेरे ग़ुस्से को बिना मेहनत के,
साइलेंट मोड में बदल देती हो।

मैं क्रोम का सेव बुकमार्क,
और तुम एक दिलकश कहानी—
जिसे बार-बार खोल कर,
पढ़ने का मन करता है।

मैं अगर ऑटो स्लीप-मोड हूँ,
तो तुम वह प्यारा-सा स्पर्श—
जो मुझे फिर से, बार बार,
जगा देता है।

हमारे बीच न कोई एंटिवायरस का डर है,
न कोई फायरवॉल है, और,
न कोई आउटडेटेड बैकअप—
हम दोनों ही, एक-दूसरे के,
रियल और जेनुअन लाइव-वर्ज़न हैं।

तुम मेरी रूट-एक्सेस,
मैं तुम्हारा फिंगरप्रिंट-लॉक—
हम ऐसे जुड़े हैं
जैसे ब्रह्माण्ड ने हमें
किसी स्थिर परमाणु में
न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की तरह
इंस्टॉल किया हो।

सच ये है—
हम मिलकर ही पूरे होते हैं।
जैसे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर,
जैसे कोड और कम्पाइलर,
जैसे लाइट और स्क्रीन,
जैसे संगीत और स्पीकर,
जैसे सांस और धड़कन।

और जब हम साथ होते हैं—
पूरा सिस्टम
एक अनुपम सिंक में आ जाता है।
न कोई लैग,
न कोई बग,
न कोई क्रैश…,
सिर्फ़ प्रेम की
परफेक्ट कम्पैटिबिलिटी।

क्योंकि सच तो यही है—
तुम हो तो मैं हूँ।
मैं हूँ तो तुम पूर्ण हो।
और हमारे साथ होने से ही
ये जीवन
एक परफेक्ट सिस्टम बन जाता है।

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