मात (301)
यूँ निगाह फेरी है आपने,
अब न रात होगी रात भर,
मुझे दिन निकलने से क्या भला,
जो न बात होगी बात भर।
मुझे इश्क करने से रोकना,
किसी नाक का ये सवाल था,
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
ये जहान सारा तुला रहा,
उसे बदगुमा सा ख्याल था।
तुझे चाहने में सुकून था,
तुझे पा के दिल ये निहाल था,
मेरे इश्क पर वो फब्तियां,
रही प्यार का हासिल सुनो,
तुझे खो के कुछ भी बचा नहीं,
तुझे पा के दिल ये बबाल था।
सिला अपनो पर ही यकीन का,
अब तो घात होगी घात भर,
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
तेरी प्यास है तेरी आस है,
पर न साथ तेरा साथ है,
मुझे है पता तू न आयेगा,
तभी दिल मेरा ये उदास है
सुनो इश्क की ये बंदगी,
जैसे बन गई है खुदकुशी,
मेरी रूह तुझसे जुड़ी हुई,
मेरे मन को तेरी तलाश है।
सुनो तेरे दिए इस दर्द से,
बस बात होगी रात भर,
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
वही धूप है वही चाँदनी,
तेरा साथ था तो बहार थी,
वो जो पल बिताए थे साथ में,
वही जिंदगी का सार थी।
तुझे देखना तुझे सोचना,
मेरी आदतों का है सिलसिला,
मेरे लब पे तेरा नाम था,
तू दिल की मेरे पुकार थी।
तू जो है नहीं तो गिला नहीं,
तेरी चाह होगी रात भर,
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
बड़ी खुशनुमा-सी थी शाम वो,
मेरे यार जब तू करीब था,
तेरी धड़कनों का शोर ही,
मेरा इश्क, मेरा नसीब था
कभी हाथ था मेरे हाथ में,
मेरी सांसों में था करार-सा,
तू बसी थी मेरी रूह में,
ये ख्याल कितना हसीन था।
जिस याद ने है छला मुझे,
वही साथ होगी रात भर,
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
ये बिछड़ना तो एक मोड़ था,
जहाँ रुक गई मेरी नजर,
तुझे ढूँढती है गली-गली,
बड़ी सूनी सी है हर डगर,
मेरी आहटों पर ही खुद मेरा,
अब यार होता है चौंकना,
मुझे तुझसे कोई गिला नहीं,
बड़ी बेबसी है मेरी मगर।
मेरी इश्क की यही बेबसी,
मेरे साथ होगी रात भर
तेरा साथ था मेरी जीत थी,
अब तो मात होगी मात भर।
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