लोकतंत्र का धर्म
बंद किए जाएंगे सारे सरकारी स्कूल, ताकि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने की मजबूरी हो। फिर जमीन बेचकर पढ़ाओ। ऐसा करने से एक दिन अमीरों के पास सारी जमीनें होंगी। सारे गरीब, जिनकी बस एक ही पूंजी होती है, वह भी खत्म हो जाएगी। देश में अमीरों की चांदी होगी, गरीब खत्म हो जाएंगे। यही सरकार का लक्ष्य है। स्कूल बंद करो, फिर कहो कि अनपढ़ हैं तो नौकरी कैसे मिलेगी। मतलब, एक स्कूल बंद होने से कितनी ही समस्याओं का समाधान हो जाता है— प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की कमी खत्म, सस्ते टीचरों की कमी खत्म न पढ़ाई का खर्च, न नौकरी मांगने वालों की भीड़, न ही सवाल पूछने वाले, एकमुश्त वोट में कोई अड़ंगा नहीं, पटरियों पर कुचलने की प्रैक्टिस के लिए नेताओं के बच्चों को भारी भीड़ मिलेगी, दोस्त उद्योगपतियों के लिए सस्ते मजदूर मिलेंगे, उल्लू बनाने के लिए आसान टारगेट मिलेंगे, और लगभग सभी समस्याएं खत्म... असल में, देश में राजनेताओं के इस तरह बेलगाम हो जाने का कारण हम ही हैं। हम स्कूल के नाम पर वोट नहीं देते, हम अस्पताल के नाम पर वोट नहीं देते, हम सड़क के नाम पर वोट नहीं दे...