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सदियाँ बीती जैसे तुमको 303
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सदियाँ बीती लगता है तुमको, देखा था अफसानों में। चमक तुम्हारी पड़ते ही लो, जान पड़ी मयखानो में। खुशबू अब भी साँसों में है, पास से बस गुजरी तुम थी, चंदन-चंदन बदन हुआ है, नाम है अब दीवानो में। होठों पर तैरी बिजली-सी, थी मुस्कान कयामत की। मुझको तेरा मिलना जैसे, ईश्वर की है नियामत-सी। तेरा हाथ लिए हाथों में, चलना है और थमना है, जीवन में सारी खुशियों की, तुम जैसे हो जमानत-सी। रहना है अंतिम सांसों तक, तेरे दिल के खानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है, नाम है अब दीवानो में। चाल है ऐसी, मौजें बहकें, नदियाँ सब शरमा जाएँ। ज़ुल्फ़ें जैसे काली घटाएं, मेरे आंगन छा जाएँ। इस आँचल में बहक गई उस, हवा का भी अंदाज़ सुनो, सूखी-मुरझाई शाखें भी, झूम-झूम लहराएँ, गाएँ। हुआ फ़साना हुस्न तुम्हारा, बिखरा है अफ़सानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है, नाम है अब दीवानों में। तेरी खुशबू जब भी आती, मन भोला बहकाती है। तेरी बातों की लय सुनकर, साँसें ठहर-सी जाती हैं। तेरे पैरों की छम-छम से, सुंदर कोई भी साज नही...
था बहक गया जिसे देख कर (302)
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था बहक गया जिसे देख कर, ये जहान शायद वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। यहाँ रंग कितने गरीब हैं, इन्हें है चमक की तलाश-सी। है उजड़ गई है बिखर गई, जैसे रोशनी भी बहार की चलो, फिर से रंग दो जहान ये, कई रंग लेकर खड़ी हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। तुम्हें मुस्कुराने की लत सी है, मैं हूँ सूखी डाली बहार में। तुझे देखना है नशा अजब, बड़ा चैन है तेरे प्यार में, मुझे अपना कहकर बुला जरा, मेरे साथ इतना लड़ी हो तुम, हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। मेरी साँसों में तेरी आस है, मेरी आसों में तेरी प्यास है। मेरे पास होके भी दूर तुम, तू ही दूर होके भी पास है, सुनो जिंदगी में खिला हुआ, कोई बाग कोई कली हो तुम! हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। क्या ये इश्क का एक खिताब है, तेरे पलकों का जो हिज़ाब है? तुझे चाहना है जूनून-सा, तेरी जिंदगी को तलाश है, मैं हूँ गलतियों की किताब एक, जो सही है इसमें वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब खुद, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।
मात (301)
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यूँ निगाह फेरी है आपने, अब न रात होगी रात भर, मुझे दिन निकलने से क्या भला, जो न बात होगी बात भर। मुझे इश्क करने से रोकना, किसी नाक का ये सवाल था, तेरा साथ था मेरी जीत थी, अब तो मात होगी मात भर। ये जहान सारा तुला रहा, उसे बदगुमा सा ख्याल था। तुझे चाहने में सुकून था, तुझे पा के दिल ये निहाल था, मेरे इश्क पर वो फब्तियां, रही प्यार का हासिल सुनो, तुझे खो के कुछ भी बचा नहीं, तुझे पा के दिल ये बबाल था। सिला अपनो पर ही यकीन का, अब तो घात होगी घात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी, अब तो मात होगी मात भर। तेरी प्यास है तेरी आस है, पर न साथ तेरा साथ है, मुझे है पता तू न आयेगा, तभी दिल मेरा ये उदास है सुनो इश्क की ये बंदगी, जैसे बन गई है खुदकुशी, मेरी रूह तुझसे जुड़ी हुई, मेरे मन को तेरी तलाश है। सुनो तेरे दिए इस दर्द से, बस बात होगी रात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी, अब तो मात होगी मात भर। वही धूप है वही चाँदनी, तेरा साथ था तो बहार थी, वो जो पल बिताए थे साथ में, वही जिंदगी का सार थी। तुझे देख...
हम दोनों एक-दूसरे से पूर्ण (300)
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हम दोनों भले ही अलग आयामों में जन्मे हों, पर किसी ब्रह्माण्डी कोड में बहुत पहले ही— किसी बाइनरी स्क्रिप्ट के 0 और 1 में हम लिख दिए गए थे। तुमसे मिले बिना मैं, चल तो रहा था— पर ठीक वैसे जैसे कोई डिवाइस अनंत काल से सेफ़ मोड में हो। अधूरा, संकुचित, फीके रंगों-सा, बस अपनी ही स्क्रीन में उलझा हुआ। और जब तुम आई— तो लगा जैसे ज़िंदगी पहली बार फुल-बूट हुई हो। सारे ड्राइवर्स, सारे अपग्रेड, अपने आप इंस्टॉल हो गए। मानो जीवन ने पहली बार हाई-रेज़ोल्यूशन में खुद को देखा हो। कभी कभी लगता है कि, हम दोनों एक दूसरे के बिना क्या हैं, शायद कुछ भी नहीं, बिल्कुल निरर्थक। अगर मैं मदरबोर्ड हूँ— तो तुम मेरी नसों में दौड़ती लेटेस्ट प्रोसेसर की क्लॉक-स्पीड, जो मेरे हर सेकंड को अपने प्रेम की ताल देती है। अगर मैं SMPS हूँ—तो तुम वह पावर-सप्लाई, जो मेरी हर वायर, हर सॉकेट में नई उम्मीद और रौशनी भर देती हो। अगर मैं CPU हूँ—तो तुम मेरा हीट-सिंक, जिसके बिना ज़रा सा लोड बढ़े तो मैं मोम की तरह पिघल जाऊँ। अगर मैं हार्ड डिस्क हूँ—तो तुम प्रेम का वह अमर डेटा, जो सदियों बाद भी, बिना करप्ट हुए, वैसा का वैसा पढ़ा जा सकेगा। अगर ...
सुबह सुबह जो छू लेते हो...
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सुबह-सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को। नयन ये बरबस झुक जाते हैं, लब-लब पर आ रुक जाते हैं, लहरा उठता है मन का सागर, पा गालों पर लाली को। स्वर्ग हुई है जीवन बगिया, पावन मन का कोना-कोना, तेरा होना मुझको भाया, तुम ही अब जीवन का गहना, आस यही कि भूल के खुद को, मन में तेरे छुप जाऊं, प्रीतम मेरे थाम लो आकर, मन की तुम लाचारी को, सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को, टूट गई सब लाज की गाठें, सदियों से थीं प्यासी रातें, मिलन के इस आवेश में भूली, करनी तुमसे कितनी बातें, राज सभी खुलते जीवन के, राग नए बजते हैं मन के, तुम ही कह दो थाम लूं कैसे, इस यौवन मतवाली को। सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन की डाली को, प्रेम भरा आलिंगन करता, ज्यों भंवरा फुलवारी को। प्रथम मिलन मधुमास की रातें, इतनी जीवन की सौगातें, तुम को पाया अब पाना क्या, सब पूरी मन की फरियादें, सब मधुमय है जीवन लय है, अमर हमारा ये परिणय है, तुमसे मेरा तन मन रोशन, भूल ही बैठी दीवाली को। सुबह सुबह जो छू लेते हो, तुम इस तन क...
रूह का पासवर्ड 299
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ये विरह नहीं, ये एक स्क्रीन फ़्रीज़ है, जहाँ मैं हूँ जहाँ तुम, पर टच में ग्लिच है। रिश्ते की ये चैट हिस्ट्री अब भी खुली पड़ी, किसी इमोजी पर मेरा न, नाम स्टिच है। तेरे चेहरे की वो साफ़ HD क्वालिटी, मेरी पलकें आज भी ऑटो-लोड कर लेती। पर जब आवाज़ सुनने की आती है बारी, तो हर बार वही नो-सिग्नल वार्निंग देती। तुम जैसे हो कोई इनबिल्ट एप्लीकेशन, जिसे डिलीट करने का ऑप्शन नहीं होता। मेरा दिल तुम्हारे पुराने वर्ज़न पर अटका हुआ है, तभी नए ज़माने का मैं कोई फोन नहीं लेता। ये दूरी नहीं—ये है वक़्त का फ़ायरवॉल, ये वायरस नहीं, खिड़की का है न्यू इंटरफेस। और इंतज़ार है उस यूनिक पासवर्ड का, जो तुम्हारी रूह के कीबोर्ड पर है कहीं ट्रेस। लेकिन, मेरी हार्ड डिस्क के हर एमबी में, एमबी ही नहीं—सुनो, हर एक बिट में। बस तुम्हारी आँखों का बाइनरी कोड लिखा है, तुम्हारी मुस्कुराहट बहती है मेरे हर सर्किट में। ये सपने नहीं—प्यार की बैकअप फ़ाइलें हैं, जहाँ हर रात डाउनलोड होता है तेरा ही नाम। सुबह आँख खुलते ही रोज एक एरर आता, क्योंकि दिल में अब भी है तेरा आउटडेटेड प्रोग्राम। मेरी रातें तेरी वॉइस-नोट की तरह हैं— बस एक लूप म...