ये हकीकत ही है, रात भर ख्वाब में 297
ये हकीकत ही है, रात भर ख्वाब में, तुमको आना ही है, तुमको जाना ही है, प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। तुम सुनो तो बहुत तेज हैं धड़कनें, प्रीत में बस जमाने की हैं अड़चनें, मन के विश्वास पर तुम यकीन तो करो दूर होंगी मोहब्बत की सब उलझनें। दहशतें कुछ भी हों, इश्क़ में पर सुनो प्रेम का गीत हमको तो गाना ही हैं। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। झूठ सच से भरी एक कहानी नहीं, मीरा यूं ही बनी थी दीवानी नहीं, प्रेम से ही सुनो सारी सृष्टि ये है, प्रेम के बिन तो कोई कहानी नहीं चाहे कुछ भी कहो, पर जहाँ के लिए इश्क सच हो मगर, एक फसाना ही है। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। जुल्फें बिखरी हैं, इनको सँवारो जरा, मुझको मझधार से तुम उबारो जरा, मन के आंगन में बिखरा अंधेरा घना, चाँद बन कर के अब तुम पधारो जरा मैं तो भटका हूँ सदियों, तेरी चाह में, तेरा दिल मेरा अंतिम ठिकाना ही है। प्यास में प्रीत बन, मात में मीत बन, तुमको मुझपे घटा बनकर छाना ही है। दूर बरसों रहे, पास आओ प्रिये, न मोहब्बत में इतना, स...