हम दोनों एक-दूसरे से पूर्ण (300)
हम दोनों भले ही अलग आयामों में जन्मे हों, पर किसी ब्रह्माण्डी कोड में बहुत पहले ही— किसी बाइनरी स्क्रिप्ट के 0 और 1 में हम लिख दिए गए थे। तुमसे मिले बिना मैं चल तो रहा था— पर ठीक वैसे जैसे कोई डिवाइस अनंत काल से सेफ़ मोड में हो। अधूरा, संकुचित, फीके रंगों-सा, बस अपनी ही स्क्रीन में उलझा हुआ। और जब तुम आई— तो लगा जैसे ज़िंदगी पहली बार फुल-बूट हुई हो। सारे ड्राइवर्स, सारे अपग्रेड, अपने आप इंस्टॉल हो गए। मानो जीवन ने पहली बार हाई-रेज़ोल्यूशन में खुद को देखा हो। कभी कभी लगता है कि, हम दोनों एक दूसरे के बिना क्या हैं, शायद कुछ भी नहीं, बिल्कुल निरर्थक। अगर मैं मदरबोर्ड हूँ— तो तुम मेरी नसों में दौड़ती लेटेस्ट प्रोसेसर की क्लॉक-स्पीड, जो मेरे हर सेकंड को अपने प्रेम की ताल देती है। अगर मैं SMPS हूँ— तो तुम वह पावर-सप्लाई, जो मेरी हर वायर, हर सॉकेट में नई उम्मीद और रौशनी भर देती हो। अगर मैं CPU हूँ— तो तुम मेरा हीट-सिंक, जिसके बिना ज़रा सा लोड बढ़े तो मैं मोम की तरह पिघल जाऊँ। अगर मैं हार्ड डिस्क हूँ— तो तुम प्रेम का वह अमर डेटा, जो सदियों बाद भी, बिना करप्ट हुए, वैसा का वैसा पढ़ा जा सकेगा। अग...