आ गये मतदान निकट

चोरों में, डाकुओं मे, फिर एक को हमने चुनना है,

आ गये मतदान निकट फिर, झूठे भाषण सुनना है।


एक अजब है बात यहां, सत्ता मे जो आ जाते हैं।

पिछ्ली सारी सत्ताओं को, मिलकर के चोर बताते है,

फिर बैठ देश को सालों तक, दीमक की भान्ति घूनना है।

आ गये मतदान निकट फिर, झूठे भाषण सुनना है।


सत्ता विपक्ष सब चेले हैं, और मिलकर खेल सब खेले है,

तू मुझे बचा, मैं तुझको छोडू, सिद्धांत यही एक पेले है।

सत्ता की खातिर मिल जुल कर, जाल कपट का बुनना है

आ गये मतदान निकट, फिर, झूठे भाषण सुनना है।


चौथा स्तम्भ कहा जिसको, लोकतन्त्र के पन्नो मे,

आज बिछे है देखो सब, सत्ता शीर्ष के चरणो मे,

जो बैठे सत्ता मे उनके, आगे तो दुम को हिलना है।

आ गये मतदान निकट, फिर, झूठे भाषण सुनना है।


पावन गंगा के जल जैसी, पावन कुर्सी की माया है,

जो बैठ गया हट जाती सब, पिछ्ले पापो की छाया है।

राजा तो अब भाग्य विधाता, त्रिदेवों से तुलना है

आ गये मतदान निकट, फिर, झूठे भाषण सुनना है।




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