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मोक्ष तजना चाहता हूँ (#304)

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मैं सफलता के सफर में, एक विफलता चाहता हूँ, प्रेम का अक्षय गरल पी, मैं अमरता चाहता हूँ, चाहता हूँ जिंदगी की शाम तक तुझको निहारूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। हाँ यक़ीनन तुमको पा मैं, मोक्ष तजना चाहता हूँ। क्या कहा मुमकिन नहीं है प्रेम में अमरत्व पाना, क्या कहा जलने न देगा प्रेम का दीपक जमाना, पर अनंत चिंगारियों-सा मैं धधकना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। तुम व्यर्थ ही हो व्यथित कि कैसे फिर पहचान होगी, ये तुम्हारी नील आँखें, प्रेम का प्रतिमान होंगी, मैं तुम्हें पहचानने की, एक परीक्षा चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। ज्ञान और अज्ञान के इस तर्क से मैं तो विफल हूँ, पर तुम्हारे प्रेम के मैं, इस धरातल पर अटल हूँ, छोड़ कर मैं हिम तपस्या, तुममें रमना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। लक्ष्य मेरा सच कहूँ तो, हिमशिखर या क्षीर नहीं है, है मेरा मन राधिका सा, तुम नहीं पर पीर नहीं है, तुमको पाना मैं नहीं बस तुममें तरना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। हो समय का क...

सदियाँ बीती जैसे तुमको 303

सदियाँ बीती लगता है तुमको,  देखा था अफसानों में। चमक तुम्हारी पड़ते ही लो,  जान पड़ी मयखानो में। खुशबू अब भी साँसों में है,  पास से बस गुजरी तुम थी, चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानो में। होठों पर तैरी बिजली-सी,  थी मुस्कान कयामत की। मुझको तेरा मिलना जैसे,  ईश्वर की है नियामत-सी। तेरा हाथ लिए हाथों में,  चलना है और थमना है, जीवन में सारी खुशियों की,  तुम जैसे हो जमानत-सी। रहना है अंतिम सांसों तक,  तेरे दिल के खानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानो में। चाल है ऐसी, मौजें बहकें,  नदियाँ सब शरमा जाएँ। ज़ुल्फ़ें जैसे काली घटाएं, मेरे आंगन छा जाएँ।  इस आँचल में बहक गई उस,  हवा का भी अंदाज़ सुनो, सूखी-मुरझाई शाखें भी,  झूम-झूम लहराएँ, गाएँ। हुआ फ़साना हुस्न तुम्हारा,  बिखरा है अफ़सानों में। चंदन-चंदन बदन हुआ है,  नाम है अब दीवानों में। तेरी खुशबू जब भी आती,  मन भोला बहकाती है। तेरी बातों की लय सुनकर,  साँसें ठहर-सी जाती हैं। तेरे पैरों की छम-छम से,  सुंदर कोई भी साज नहीं, तेरे नाम ...

था बहक गया जिसे देख कर (302)

था बहक गया जिसे देख कर, ये जहान शायद वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। यहाँ रंग कितने गरीब हैं, इन्हें है चमक की तलाश-सी। है उजड़ गई है बिखर गई, जैसे रोशनी भी बहार की चलो, फिर से रंग दो जहान ये, कई रंग लेकर खड़ी हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। तुम्हें मुस्कुराने की लत सी है, मैं हूँ सूखी डाली बहार में। तुझे देखना है नशा अजब, बड़ा चैन है तेरे प्यार में, मुझे अपना कहकर बुला जरा, मेरे साथ इतना लड़ी हो तुम, हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। मेरी साँसों में तेरी आस है,  मेरी आसों में तेरी प्यास है। मेरे पास होके भी दूर तुम, तू ही दूर होके भी पास है, सुनो जिंदगी में खिला हुआ, कोई बाग कोई कली हो तुम! हो खुदा की जैसे किताब एक, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम। क्या ये इश्क का एक खिताब है, तेरे पलकों का जो हिज़ाब है? तुझे चाहना है जूनून-सा, तेरी जिंदगी को तलाश है, मैं हूँ गलतियों की किताब एक, जो सही है इसमें वही हो तुम। हो खुदा की जैसे किताब खुद, बड़ी फ़ुर्सतों में बनी हो तुम।

मात (301)

यूँ निगाह फेरी है आपने,  अब न रात होगी रात भर,  मुझे दिन निकलने से क्या भला,  जो न बात होगी बात भर। मुझे इश्क करने से रोकना, किसी नाक का ये सवाल था, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। ये जहान सारा तुला रहा,  उसे बदगुमा सा ख्याल था। तुझे चाहने में सुकून था,  तुझे पा के दिल ये निहाल था, मेरे इश्क पर वो फब्तियां,  रही प्यार का हासिल सुनो, तुझे खो के कुछ भी बचा नहीं,  तुझे पा के दिल ये बबाल था। सिला अपनो पर ही यकीन का,  अब तो घात होगी घात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। तेरी प्यास है तेरी आस है,  पर न साथ तेरा साथ है, मुझे है पता तू न आयेगा,  तभी दिल मेरा ये उदास है सुनो इश्क की ये बंदगी,  जैसे बन गई है खुदकुशी,  मेरी रूह तुझसे जुड़ी हुई,  मेरे मन को तेरी तलाश है। सुनो तेरे दिए इस दर्द से,  बस बात होगी रात भर, तेरा साथ था मेरी जीत थी,  अब तो मात होगी मात भर। वही धूप है वही चाँदनी,  तेरा साथ था तो बहार थी, वो जो पल बिताए थे साथ में,  वही जिंदगी का सार थी। तुझे देख...