P278 कुछ नया सा हुआ

कुछ नया सा हुआ इश्क में रात भर,
प्यार से दिल मेरा भींगता ही रहा,
तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे,
अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा।


थे बहाने बहुत तुम ही आए नहीं,
मेरे सपनों को पर रोक पाए नहीं,
तेरी यादों में बस दिल मेरा बेखबर,
सदियां बीती मगर रीतता हो रहा।
तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे,
अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा।

तुमसे बेहतर मेरे इश्क का रहनुमा,
न मिला और न कोई मिलेगा कभी,
कैसे हो ये भला स्वप्न मैं तोड़ दूं ,
दिन जो निकला नयन मींचता ही रहा
तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे,
अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा।


पास जब थे, मेरे तब भी क्या पास थे,
खोए खोए तुम्हारे सब अहसास थे
तुम तो मुंह फेर कर बस सताते रहे,
मैं तुम्हें बाहों में खींचता ही रहा।
तुम तो मुंह फेर कर बस सताते रहे,
मैं तुम्हें बाहों में खींचता ही रहा।

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