भीख और लीज की आजादी

क्या कहा सन सैंतालिस की, वो आजादी भीख थी,
क्या कहा मरकर मिली जो, वो आजादी लीज थी।
लग रहा कि विष वमन करते हुए कुछ नाग हैं,
लग रहा राजाओं के कुछ, पाले हुए ये घाघ हैं।
लाख हो कटुता किसी से लाख ही मतभेद हों,
पर कहो न जिसको सुनकर भारत माँ को खेद हो।
ये हुआ तो वीरों का जो शीश अमर झुक जाएगा
ये हुआ तो कौन भगत की पुण्य कथायें गायेगा।
कौन बोस को खून देगा, कौन बिस्मिल फिर उठेगा,
स्वर्ग में बैठे शहीदों का अमर फिर शीश झुकेगा।
ओ कपूतों ज्ञान रख लो, अमर तिरंगा गान रख लो,
दे गए खुद मर के हैं जो, उस विजय का मान रख लो।

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