इश्क़ में डूबा था दिल

कुछ इश्क़ में डूबा था दिल, कुछ तुमने था बहकाया,
हैं नींद से बोझल आंखें, मैं बरसों सो न पाया,
जो गीत बहे आंखों से, वो गीत मैं कैसे गाऊँ,
जो दर्द दफन सीने में, दुनियां से कह न पाया।


तुमने मजबूर किया है, जीवन से दूर किया है,
हम प्रेम में घुट घुट जीते, तुमने भरपूर जिया है,
सारी खुशियों का सौदा, प्रेम से ही कर डाला,
तुम अच्छे सौदागर थे, सौदा ये खूब किया है,
हाँ ये भी सच जीवन का, है पाठ पढ़ाया सच्चा,
प्रेम पर चढ़ तुम निकले, मैं प्रेम से बढ़ न पाया।
हैं नींद से बोझल आंखें, मैं बरसों सो न पाया।
जो गीत बहे आंखों से, वो गीत मैं कैसे गाऊँ,
जो दर्द दफन सीने में, दुनियां से कह न पाया।


हम प्रेम को समझे जीवन, तुम प्रेम को चांदी सोना,
बस तोड़ दिया तुमने दिल, था जैसे एक खिलौना,
कहो प्रेम का कैसे कोई, नव गीत गढ़ेगा फिर से,
दो पल का हँसना बन जाये, जीवन भर का रोना,
देखो पल भर में टूटे, जो स्वप्न सजाए हमने,
दिल मे चुभते नश्तर से, नव स्वप्न मैं बो न पाया।
हैं नींद से बोझल आंखें, मैं बरसों सो न पाया।
जो गीत बहे आंखों से, वो गीत मैं कैसे गाऊँ,
जो दर्द दफन सीने में, दुनियां से कह न पाया।


खिल जाएंगी बागों में, फिर फूलों सब क्यारी,
फिर गाएंगी अमियाँ पर, कोयल वो प्यारी प्यारी,
मिल जाएगा जीवन में फिर, सपना कोई अनजाना,
दिल भूल नहीं पायेगा, जीते जी अपनी यारी।
जीवन की सारी घड़ियां, तिल तिल कर के बीतेंगी,
थी पीर हृदय में गहरी, तुम गए मैं रो न पाया।
हैं नींद से बोझल आंखें, मैं बरसों सो न पाया।
जो गीत बहे आंखों से, वो गीत मैं कैसे गाऊँ,
जो दर्द दफन सीने में, दुनियां से कह न पाया।

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