दिल की कलम से: #1सफर
अगर कोई नया सफर शुरू करें और कुछ लोग उसमे आपको बुरा बोलें तो कोई चिंता की बात नही। क्योंकि आप जब कुछ करो तो 3 तरह के लोगो से सामना होता है एक वो होते है जो आपके साथ चलेंगे, आपको सहयोग देंगे और आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने में सहयोग देंगे।
दूसरे वो जो आपकी तांग खीचेंगे, आपको बुरा कहेंगे, आपकी अच्छी बातों को कमजोरी समझेंगे, आपकी निंदा करते रहेंगे लेकिन वो आपकी बुराइयां आपके सामने लाते रहेंगे, आपको आपकी कमजोरियां बताते रहेंगे।
तीसरे तरह के लोगों 2 रूप है, एक बिना बात आपकी प्रसंशा करेंगे आपकी हर बात की चाहे वो गलत हो या सही, या आपकी उल्टी सीधी बुराइयां करेंगे जिनका आपसे कोई मतलब हो या न हो। ये वैसे ही होते है जैसे आजकल के सभी राजनीतिक पार्टियों के अंधभक्त टाइप लोग जो हर बात में आपको बड़ा महान दिखएँगे। और दूसरे वो जो बिना बात बुराई करेंगे हर बात को एक ही नज़र से देखेंगे कि आपको कैसे नीचा दिखाया जाए।
पहले तरह के लोग मित्र होते है ये कॄष्ण की तरह होते है जो आपको हर आपदा से हर परेशानी से बचा ले जाते है।
निंदक न्यारे राखिए... कबीर जी ने दूसरे तरह के लोगो के लिए कहा है। ये ही लोग हर महान आदमी के पीछे, हर महान उद्देश्य के पीछे होते है। इनके बिना आज तक कोई महान नही बन पाया है।
और "अक्लमंद दुश्मन बेबकूफ दोस्त से अच्छा होता है" ये तीसरे तरह के लोगों के लिए कहा गया है, इनके चंगुल में फंसा इंसान कभी कुछ नही कर सकता। इस तरह के बहुत बेकार होते है ये आपको अपने मार्ग से भटका सकते है। इनपर कभी ध्यान नही देना चाहिए।
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