मिलन की कहानी old

अपनी मोहब्बत की, है ये कहानी,

पहली मिलन की वो संध्या सुहानी

वो घूंघट मे तेरा, सुर्ख लाल चेहरा,

शर्मो हया का था, हर ओर पहरा,

वो घूंघट हटाकर, तुझे देखना बस,

नजरो मे नजरे लिए बैठना बस,

मोहबत मे तेरी मेरा डूब जाना,

सांसों की गर्मी, तेरा पास आना,,

लरजते हुए लब, तेरा हाथ थामे,

दिल की बेताब धडकनो को सम्भाले,

वो अह्सास पहला तुम्हारे लबो का,

वो अंगुली का तेरी, छुअन से बहकना,

उसी आवेश मे, दूर हटना तुम्हरा

तेरा लडखडाना मेरा हडबड़ाना

तुम्हारी कमर पकड़ लेना अदा सेते

तेरा और मेरा कही खो जाना

कहाँ से ये आई आवाज जगाने,

मेरे ख्वाब का फिर से यूं ही टूट जाना। 


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