मैं सफलता के सफर में, एक विफलता चाहता हूँ, प्रेम का अक्षय गरल पी, मैं अमरता चाहता हूँ, चाहता हूँ जिंदगी की शाम तक तुझको निहारूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। हाँ यक़ीनन तुमको पा मैं, मोक्ष तजना चाहता हूँ। क्या कहा मुमकिन नहीं है प्रेम में अमरत्व पाना, क्या कहा जलने न देगा प्रेम का दीपक जमाना, पर अनंत चिंगारियों-सा मैं धधकना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। तुम व्यर्थ ही हो व्यथित कि कैसे फिर पहचान होगी, ये तुम्हारी नील आँखें, प्रेम का प्रतिमान होंगी, मैं तुम्हें पहचानने की, एक परीक्षा चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। ज्ञान और अज्ञान के इस तर्क से मैं तो विफल हूँ, पर तुम्हारे प्रेम के मैं, इस धरातल पर अटल हूँ, छोड़ कर मैं हिम तपस्या, तुममें रमना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। लक्ष्य मेरा सच कहूँ तो, हिमशिखर या क्षीर नहीं है, है मेरा मन राधिका सा, तुम नहीं पर पीर नहीं है, तुमको पाना मैं नहीं बस तुममें तरना चाहता हूँ, मोक्ष को बस त्याग कर मैं, प्रेम वरना चाहता हूँ। हो समय का क...
हर्ष विकंपित हो रही हैं, मन में लो सारी व्यथाएं राम तुम आए हो गूंजें, प्रेम से सब दस दिशाएं। हम व्यर्थ का ज्ञान भर मन, तेरा-मेरा कर रहे हैं, राम तुम कर दो कृपा बस, ज्ञान ऐसा भूल जाएं। कुछ नहीं ऐसा जगत में, जिसमे मेरे नाथ न तुम कैसे मानूं आ रहे अब, सदियों तक तुम थे न आए। हम सुनो! अज्ञान को ही, ज्ञान अपना कह रहे हैं, ज्ञान गीता का भुला कर, रच रहे कलि की ऋचाएं। तुम प्रभु जो सोच भर लो, सृष्टि नव निर्माण होगी, क्यों प्रभु अभिमान इतना, घूमता दस सिर उठाए। नारायण तुमको किया है, दूर नर से खेल देखो, खेलती माया महाबली, कैसे मन खुद को बचाए। क्या धरा के पुण्य उदय को, कल्कि तक रुकना पड़ेगा, राम बजरंगी से कह दो, पाप सब मन के मिटाएं।
ये विरह नहीं, ये एक स्क्रीन फ़्रीज़ है, जहाँ मैं हूँ जहाँ तुम, पर टच में ग्लिच है। रिश्ते की ये चैट हिस्ट्री अब भी खुली पड़ी, किसी इमोजी पर मेरा न, नाम स्टिच है। तेरे चेहरे की वो साफ़ HD क्वालिटी, मेरी पलकें आज भी ऑटो-लोड कर लेती। पर जब आवाज़ सुनने की आती है बारी, तो हर बार वही नो-सिग्नल वार्निंग देती। तुम जैसे हो कोई इनबिल्ट एप्लीकेशन, जिसे डिलीट करने का ऑप्शन नहीं होता। मेरा दिल तुम्हारे पुराने वर्ज़न पर अटका हुआ है, तभी नए ज़माने का मैं कोई फोन नहीं लेता। ये दूरी नहीं—ये है वक़्त का फ़ायरवॉल, ये वायरस नहीं, खिड़की का है न्यू इंटरफेस। और इंतज़ार है उस यूनिक पासवर्ड का, जो तुम्हारी रूह के कीबोर्ड पर है कहीं ट्रेस। लेकिन, मेरी हार्ड डिस्क के हर एमबी में, एमबी ही नहीं—सुनो, हर एक बिट में। बस तुम्हारी आँखों का बाइनरी कोड लिखा है, तुम्हारी मुस्कुराहट बहती है मेरे हर सर्किट में। ये सपने नहीं—प्यार की बैकअप फ़ाइलें हैं, जहाँ हर रात डाउनलोड होता है तेरा ही नाम। सुबह आँख खुलते ही रोज एक एरर आता, क्योंकि दिल में अब भी है तेरा आउटडेटेड प्रोग्राम। मेरी रातें तेरी वॉइस-नोट की तरह हैं— बस एक लूप म...
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