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काश कि भारत ऐसा बने

न कोई बच्ची, को नाले में फेंक कर आएगा। लड़का लड़की दोनो को बराबर माना जाएगा। न किसी बच्चो या महिला को बलात्कार का डर सताएगा, फूल से कोमल तन मन को, हरगिज कुचला न जाएगा।। न कोई इंसान मोब लीनचिंग में मारा जाएगा, और न देश मांस निर्यात में नंबर वन पर आएगा। सब उस ईश्वर के बच्चे है, एक बराबर एक ही मान कर, न कोई कुरान, गीता का "ईश्वर एक है" का पाठ भुलायेगा। कानून से डरेंगे सब, न्याय सभी को समय पर मिल जाएगा। न कोई पुलिस वाला 100 रुपये में, मान जाएगा। एक दूसरे के साथ चलेंगे, हर घर मे उजियाला आएगा, न कोई सड़क पर घायल को छोड़, घर को जाएगा। न झूठ का कारोबार चलेगा, नेता झूठा न जीत पायेगा न कोई धर्म, जात, पैसा, दारू में वोट बेच कर आएगा। शिक्षा का सम्मान सभी को, हर बच्चा स्कूल जाएगा, भीख मांगता कोई जब लाल बत्ती पर न पायेगा। मिलेगा सबको रोजगार, न बेरोजगार कहलायेगा, ईजीनियरिंग करके कोई कहीं, रिक्शा ठेला न चलाएगा। चमचा बनकर ये मीडिया, झूठी खबरें न दिखयेगा। नोट में चिप घंटो तक, लोकतंत्र से न खेला जाएगा। सब अपने कामो को मंदिर की भांति पूजेंगे, अखबार भी सच लिखकर, आईना बन जायेगा।

कश्मकश

शाम सुहानी हो जाएगी, तुमसे दो बातें जो कर लूँ मन मोहे, तूं, संध्या आभा, किसको मैं यादों में भर लूँ। प्रेम के इस झरने मे बैठे, क्या जीवन ये जी पाऊँगा। खो देने की आशंका से, कैसे पर खुशियों को तज दूँ। अटल सत्य है जीवन मानो, मृत्यु क्रिया की प्रतिक्रिया। कैसे मैं एक प्रतिक्रिया पर, गिरवी सारी क्रिया रख दूँ। जाने या अनजाने में हों, पाप मगर हो ही जाते है, कर्म करूँ, कुछ पुण्य कमाऊं, पाप या बस घाटों पर तज दूँ। सोच रहा रसमय सृष्टि से, क्या दो बूंदे पी पाऊँगा। परवशता का ढ़ोल पीटकर, कैसे मैं कर्मो को तज दूँ।

तुम इश्क़ हमारा भूलो

तुम इश्क़ हमारा भूलो अधिकार तुम्हें है लेकिन, तुमको दिल ये भुला दे हमको स्वीकार नही है। तुम लाख कहो कि मन में, उल्फ़त ही नहीं है जरा-सी, तुम खुद को तो समझा लो, तुम्हें हमसे प्यार नहीं है दिल काबू में आ जाये, तो बंजर हो जाये धरती, मन का उन्मुक्त न होना, रब को स्वीकार नही है। जीवन का इस जग में, आधार प्रेम है मानो, प्रेम बिना खुद ईश्वर का ही आधार नही है। अब मान लिया तो आओ नव प्रेम के अंकुर सींचें, अब ये न कहना तुमको मुझसे ही प्यार नही है।

स्वप्न नगरी

एक शहर बनाऊं ऐसा, जिसमे कोई गैर नहींं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहींं हो। हों रातें काली लेकिन,  कोई बेटी न डर पाए। बेफिक्र सभी मंजिल पर,  वो आगे बढ़ती जाए। जो उसका रास्ता रोके, ऐसी अंधेर नहींं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहींं हो। जिस आंगन में हों कान्हा, वही गुरवाणी भी गाएँ वहीं बैठें नमाजी सारे, वहीं यशु की प्रेयर गाएँ। वहीं जैन, बुद्ध की शिक्षा, अज्ञान की खैर नहींं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहींं हो। इस नगर में कोई मानव, कभी भूखा न सो पाए। कोई बच्चा बीच सड़क पर, न भीख मांगने जाए। सबको जीवन की सुविधा, पैसे की मेहर नहींं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहीं हो। हो राजा न अभिमानी, करें मंत्री न मनमानी। जहां लोक का तंत्र रहे बस, जहाँ न्याय में हो आसानी। निष्पक्ष जहां हो खबरें, सत्ता का जोर नहीं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहींं हो। हो साफ हवा ओ पानी, हों चिड़ियों की भी कहानी। जहां तितली जुगनू डोलें, है स्वप्न मेरे आसमानी। पर काश ये सच हो जाएं, बस इसमे देर नहींं हो। सपने सबके हों पूरे, कोई दिल में बैर नहीं हो।

बलिप्रथा और मांसाहार

किसी के घर मे कोई बीमार पर गया या फिर ऐसा कुछ हुआ तो तो तुरंत मन्नत मांग लेते हैं।और बाद में जब बके मन मुताबिक काम हो जाता है तो उन्हें लगता है हम कबूल थे इसलिए ये काम पूरा हुआ।और जाकर बलि दे देते हैं। किसी का कोई अपना खो गया तांत्रिक ने बोला बलि दो तो मिल जाएगा। लेकिन ये सब सिर्फ अंधविश्वास है। ये सिर्फ इसलिए बोला जाता है कि वो लोग बाद में उस बलि जीव से पार्टी करते हैं। आज के दिन कोई भी तांत्रिक हो सब शराब, नशे के आदी होते है। तो बकरा मिल गया तो हो गई पार्टी।  मेरे हिसाब से जो मेरा मन कहता है कि बलि प्रथा प्राचीन समय से चली आ रही है। विगत में मानव जंगल मे रहता था और विकास के चरण में था। वो शिकार करता था। उसने सूर्य इत्यादि की पूजा शुरू कर दी थी  वो शिकार भी करता था और खेती भी शुरू की। धीरे धीरे खेती बढ़ने लगी शिकार कम हुआ तो मानव ने शिकार के लिए नियत समय तय किया होगा की जब खेती कम होगी तब शिकार करेंगे। इसलिए देखिए दोनो नवराते दोनो मुख्य फसल रवी और खरीफ के लगभग मध्य में पड़ते है उसके बाद ही खेती शुरू होती है।  मेरे उसी समय शिकार करके या पकड़ कर पशु लाये जाते होंगे। कोई ज्याद...

ब्रेकिंग न्यूज़ और पत्रकार

कैसी बारूदी हवा चली कि बुझते,  आजादी के सब दीप महान, आज कलुष सा सबका चेहरा, सबने ही लूटा देश महान। अगर कोई सच मे देश के न्यूज़ चैनल विशेषकर शाम को देखता है तो सबकी नज़रों में आज आजादी के नेता भी बंट गए है। पटेल को बड़ा दिखाने के लिए नेहरू को छोटा किया जा रहा है। गांधी की काट के लिए सावरकर को सामने लाया जा रहा है। मैं समझ नही पा रहा कि कैसे सिर्फ मूर्ति बना देने से पटेल बड़े हो जाएंगे? वो वैसे ही बड़े है, सरदार सरोवर बांध सबसे बड़ा है उससे बिजली भी बनेगी दूसरे काम भी होंगे। उसका उदघाटन किसने किया? कुछ ऐसा करना जिससे देश का भला ही जरूरी है या कोई मूर्ति बनवाना। कोई भी तथ्य नही सिर्फ एंकर की बस बातें। न्यूज़ पेपर में खबरें सरकार के विज्ञापन की तरह प्रकाशित होती हैं। सरकार की प्रशंशा पहले पेज पर बड़े खबर और उसकी गलतियां अंदर के पेज पर छुपा कर। क्या सच मे आज पत्रकारिता हो रही है या सिर्फ चमचागिरी हो रही है? पता नही चल पा रहा। सिर्फ चैनल वाले अपने trp के चक्कर में सिर्फ वही खबर दिखाते है जिससे कि जनता एक वोट बैंक में बदलने लगे। मीडिया अगर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है तो उसका एकमात्र कर्म सरकार की न...

G गॉड

एक बार नारद जी भगवान विष्णु की शरण मे गए नारायण, नारायण प्रभु जैसा कि आपने गीता में कहा था कि ईश्वर सर्वव्यापी है। सर्वत्र है। सर्वज्ञ है। सर्वशक्तिमान है। हज़ारो आंखे है जिसके। हज़ारो हाथ है जिसके। हज़ारो मस्तिष्क है। अजर है अमर है देश समाज की सीमाओं के परे है। जन्म मृत्यु से परे है अज्ञानता जिसका कुछ नही बिगाड़ सकती। जिसको जाना भी नही जा सकता। जिसको बांधा नही जा सकता। सब जिसको समझते है कि मैं जानता हूँ लेकिन कोई नही जानता। जिसको सब समझते है मैं नही जानता वही जानता है। जी गुणों से भरा है। जो निर्गुण भी है। जो साकार है। जो निराकार भी है। जिसके हज़ारो रूप है, उसको कोई देख नही सकता। लेकिन वो सबमें व्याप्त है। प्रभु आपने कहा था कि आप सबको उसके भाव अनुसार मिलते हो "जाकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखहीं टिन तैसी" तो क्या आप उसी प्रकार कलयुग में क्या मानव के साथ आप नही होंगे? मानव कलयुग से अकेला कैसे लड़ पायेगा? अरे नारद इतने सवाल। मुझे मालूम है मानव मात्र की भलाई के लिए तुम सदा चिंतित रहते हो यही ये बताता है कि तुम कितने सहृदय हो। भगवान ने नारद जी को रोकते हुए...