तुम इश्क़ हमारा भूलो

तुम इश्क़ हमारा भूलो अधिकार तुम्हें है लेकिन,
तुमको दिल ये भुला दे हमको स्वीकार नही है।


तुम लाख कहो कि मन में, उल्फ़त ही नहीं है जरा-सी,
तुम खुद को तो समझा लो, तुम्हें हमसे प्यार नहीं है

दिल काबू में आ जाये, तो बंजर हो जाये धरती,
मन का उन्मुक्त न होना, रब को स्वीकार नही है।


जीवन का इस जग में, आधार प्रेम है मानो,
प्रेम बिना खुद ईश्वर का ही आधार नही है।

अब मान लिया तो आओ नव प्रेम के अंकुर सींचें,
अब ये न कहना तुमको मुझसे ही प्यार नही है।

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