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P277 कौन है आई

फाल्गुन की मादकता पर जैसे, अल्हड़ता सावन की छाई, पतझड़ में बागों का खिलना, कौन जो सावन बन कर आई। किसने सबका मन भरमाया, किसने बदली रीत जगत की, मन शंकित शायद ये भ्रम है, उतर स्वर्ग से कौन है आई। कौन है वो किसने फैलाया, अजब नशा-सा पूरे जग पर, अमर प्रेम की नव परिभाषा, सुंदरतम लिख दी है नभ पर, गजब हुए हालात हैं मन के, ले ली सपनों ने अंगराई। मन शंकित शायद ये भ्रम है उतर स्वर्ग से कौन है आई। मंच पर आभासी दुनिया के, मरुस्थली प्रपात का दिखना, शाम ढले छत पर मद्धिम-सा, तेरा और कभी चांद का चढ़ना, इतने सारे भ्रम की दुनिया, प्रेम तुम्हारा एक सच्चाई। मन शंकित शायद ये भ्रम है उतर स्वर्ग से कौन है आई। सुंदरतम रचना के जैसी, भावोत्तम कथना के जैसी, निश्छलता प्रकृति की पूरण, मादकता मदना के जैसी, कैसे संभव एक तुम में ही, भर दी सृष्टि की तरुनाई। मन शंकित शायद ये भ्रम है उतर स्वर्ग से कौन है आई। मन से पिघल गया है सारा, जो संताप भरा जग ने था, मिटती सारी पीड़ा तन की, मिटता ताप भरा मन में था, ऐसी शीतल इन केशों की, बदली है जीवन पर छाई मन शंकित शायद ये भ्रम है उतर स्वर्ग से कौन है आई।

P278 कुछ नया सा हुआ

कुछ नया सा हुआ इश्क में रात भर, प्यार से दिल मेरा भींगता ही रहा, तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे, अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा। थे बहाने बहुत तुम ही आए नहीं, मेरे सपनों को पर रोक पाए नहीं, तेरी यादों में बस दिल मेरा बेखबर, सदियां बीती मगर रीतता हो रहा। तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे, अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा। तुमसे बेहतर मेरे इश्क का रहनुमा, न मिला और न कोई मिलेगा कभी, कैसे हो ये भला स्वप्न मैं तोड़ दूं , दिन जो निकला नयन मींचता ही रहा तुम बहुत दूर थे, पर तेरा दिल मुझे, अपनी बाहों में बस खींचता ही रहा। पास जब थे, मेरे तब भी क्या पास थे, खोए खोए तुम्हारे सब अहसास थे तुम तो मुंह फेर कर बस सताते रहे, मैं तुम्हें बाहों में खींचता ही रहा। तुम तो मुंह फेर कर बस सताते रहे, मैं तुम्हें बाहों में खींचता ही रहा।

तुम्हारी नजरों से पी कर बहका

तुम्हारी नजरों से पी मैं बहका,  जमाना या खुद बहक गया है, नशा तुम्हारा चढ़ा है ऐसा,  खिजां का मौसम महक गया है। जरा सा ही तो छुआ था तुमको, बदन हमारा हुआ है चंदन, था भोला भाला हमारा दिल ये, मिला जो तुमसे चहक गया है। है रात प्यासी हमारी कब से, तुम्हारी सांसों में डूबना था, नजर झुकाई हैं तुमने ऐसे, कि शोला तन में दहक गया है। जरा छुओ फिर ये घाव दिल के, भरेंगे कैसे बिना तुम्हारे, दीए जलाए जो रोशनी को, ये घर उसी से लहक गया है। कोई नहीं जो बताए हमको, कहां पे मन को करार होगा, कि दर्द खुद ही दवा हुआ है, हमें तो कोई यूं छल गया है।

हिरनी सी आंखों में देखो

हिरनी सी आंखों में देखो, नैना मेरे अटक गए हैं, मेरे दिल के अरमां सारे, इनमें आकर भटक गए हैं। कैसे उनको पा लेने के, दिल ने सब अरमान सजाए, कैसे उलझा दिल जुल्फों संग, बेदर्दी वो झटक गए हैं। आज अभी तक हुआ न ऐसा, जीवन में कितनों को देखा, उनको देखा बस दिल के सब, स्वप्न उन्हीं में भटक गए हैं। होठों की लाली में डूबी, लाली सारे मयखानों की, धार हुई है कुंद मय की, लब पर लब जो अटक गए हैं। नयनों ने जो बाण चलाए, उनसे बचना नामुमकिन था, इन नयनों से घायल देखो, महफिल में सब लटक गए हैं। कुछ तो था मुस्कान का जादू, और कुछ पागलपन सा मेरा, जितना चाहा बचना इनसे, इनमे ही हम भटक गए हैं। सारे गुलशन जल जाएंगे, हुस्न तुम्हारा कुछ ऐसा है, जुल्फों का उड़ना इठलाना, सावन को ये खटक गए हैं।

दिल को टुकड़ों में सजा दी मैंने

दिल को टुकड़ों में सजा दी मैंने तेरी तस्वीर घर में ही लगा ली मैंने। किस-किस की कही का क्या देता जवाब, एक चुप्पी सी मेरे होठों पर लगा ली मैंने। एक वो जो मेरे होने पर फिदा था बरसों, आज उस दुनिया से नजरें ही फिरा ली मैंने। लौट आएगा गया वक्त मुमकिन ये नहीं, तेरी यादों की चिता कल ही जला दी मैंने। मन का तूफान रुका कब है किसी के रोके, दिल की कश्ती ही लहरों को थमा दी मैंने। मैं बिखर जाऊंगा इस बात का यकीन था उसे, उसकी नजरों से नजरें ही हटा ली मैंने। कोई आहट नही होगी, मेरे दिल पर कभी, दिल में दीवार पत्थर की बना ली मैंने। शुक्रिया तेरा मुझे मुझसे मिलाया तूने, तेरे सजदे में नजरें ये झुका ली मैंने।

तरस न आया

तरस न आया पल भर उनको, सदियों की ये जुदाई  है, पल भर न बाँहों में आये,  जग से प्रीत निभाई है। तरस न आया पल भर उनको.... कुछ सपनों ने छीना सब कुछ, रिश्ते नाते, दुनिया, यारी, छीन लिए पल भर में हमसे, चीजें जो हमको थी प्यारी, जिन सपनों में जी लेने को, कालकूट विष पान किया, उन सपनों ने हमसे देखो, कैसी प्रीत निभाई है। तरस न आया पल भर उनको.... जग को सारे यकीन नहीं था, स्वर्ग प्रेम से बौना है, उसको पाना जग को खोना, उसको खो बस रोना है, चाल चली नियति ने ऐसी,  मन ये ठूठ, पाषाण हुआ, जीत गए सब बाजी अपनी, प्रेम की बस रुसवाई है। तरस न आया पल भर उनको.... प्रबल कठिनतम वो जीवन जो, बिन तेरे उपहार मिले, सदियों तक हो विरह का रोना, जब मिले तो तेरा प्यार मिले, क्रूर समय की निर्मम गति से, जीवन खुद संताप हुआ, जिसको अमृत मान लिया था, वो जीवन ही दुहाई है। तरस न आया पल भर उनको.... जो होना वो होना ही है, किसने ये इंकारा है, नियति ही अंतिम शक्ति है, कब उसपर जोर हमारा है, करने को कुछ भी कर लो पर, समय कहीं कब ठहरा है, जीवन का मतलब तो खुद के, जीवन से ही लड़ाई है तरस न आया पल भर उनको....

असर तुम्हारा शामिल होगा

असर तुम्हारा शामिल होगा, इस तपती गर्मी में कुछ तो, मन की तपन बढ़ा देती हो, तन में अगन लगा देती हो, तुम देती हो ताप बढ़ा यूं, सारा जग ये आह है भरता, मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। भूला ना दिल सदियां बीती, होठों पर होठों का आना, नयनों का नयनों में थमना, सांसों पर सांसों का छाना, दुनिया के जो नियम थे सारे, उस पल में कुछ याद नहीं थे, हम में तुम थे तुम में हम थे, बातें थीं अल्फाज़ नहीं थे, नयनों से मधुमय एक धारा, जीवन में बिखरा देती हो मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। तन लचकाती, मन भरमाती, नयनों से मदिरा बरसाती, डाल–डाल पर फूल–फूल पर, ईर्ष्या की तुम आग लगाती, सागर लहरें, रिमझिम वर्षा, सावन मधुबन तेरी चर्चा, रोज स्वप्न में आकर देखो, मुझको तुम हो खूब सताती, कितना होगा जीवन मधुमय, हंसकर तुम बतला देती हो, मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। जीवन के सारे दोराहे, तुम पर आकर एक हुए हैं, भाव जो सारे बौराए थे, मिलकर तुमसे नेक हुए हैं, तुमसे नजरों का मिल जाना, तुममें दिल का खोते जाना, तुमसे मिलकर बैरंगे सब, स्वप्न मेरे रंगरेज हुए हैं, जन्मों मैं किस र...