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मैं क्या ढूंढता हूँ?

मैं क्या ढूंढता हूँ, मैं क्यों ढूंढता हूँ , दिवाना बना यूं किधर घूमता हूँ, मेरे दिल पर किसका असर हो गया है, मैं किसको यूं ही बेख़बर ढूंढता हूँ .... बहुत उम्र मैंने यूं ही बिता दी, नजर से पिला दे, मिला न वो साकी, तन्हा सी मैं एक नजर ढूंढता हूँ, मय में है किसका असर ढूंढता हूँ बहुत देर से यूं ही चलता रहा हूँ, अंधेरों में दिल की भटकता रहा हूँ जाने न किसका मैं घर ढूंढता हूँ, मिलता नहीं है मगर ढूंढता हूँ, मंदिर में पाया न मस्जिद में पाया, न सागर में पाया न साहिल पर पाया, वो क्या जिसको शाम-ओ-सहर ढूंढता हूँ, महफिल में किसकी नजर ढूंढता हूँ..... मैं क्या ढूंढता हूँ, मैं क्यो ढूंढता हूँ, दिवाना बना ये किधर घूमता हूँ, समझ में न आई थी ये बात मुझको, देखा नहीं मैने जब तक था तुझको.. तुझे ढूंढता हूँ, तुझे ढूंढता हूँ, दिवाना बना मैं तुझे ढूंढता हूँ, तन्हा सी तेरी, नजर ढूंढता हूँ, मैं मय में, तेरा ही असर ढूंढता हूँ, कब से तेरा ही मैं घर ढूंढता हूँ, तुझी को मैं शाम-ओ-सहर ढूंढता हूँ, महफिल में तेरी नजर ढूंढता हूँ, नजर ढूंढता हूँ, नजर ढूंढता हूँ, तुझे ढूंढता हूँ, तुझे ढूंढता हूँ,...

आदि, अंत, मध्य तुम सब हो

आदि, अंत, मध्य तुम सब हो,  मेरे इस जीवन सफर का, दिन रात सुबह हो मेरी,  तुम्ही रंग मेरे गुलशन का। बहुत दिवस बीते तुम आये,  आये भी न आये जैसे, कितनी खुशियां लेकर आये,  लाये, कुछ न लाये जैसे। माना तुम ही प्राण हो मेरे,  सच्चे एक भगवान हो मेरे। बोलो कब तक यूँ ही जलेगा,  बुझता दिया मेरे जीवन का। दिन रात सुबह हो मेरी,  तुम्ही रंग मेरे गुलशन का। कोई ऐसी बात नही,  जो तुमसे कह पाये हम, कोई ऐसी रात नहीं कि,  ख्बावों में खो जायें हम, मेरे कण्ठों की बोली तुमही,  मेरी साँझ और रात तुम्हीं हो, साँसो की सरगम हो तुम ही, साज तुम्ही मेरे जीवन का। दिन रात सुबह हो मेरी,  तुम्ही रंग मेरे गुलशन का। आते नहीं तो अच्छा होता,  हम जीवन में सामने तेरे, इस दिल में तन्हाई भले थी,  पर फिर भी कुछ अरमान थे मेरे, इस दिल के मेहमान हो अब तुम,  जिंदा मैं और जान हो अब तुम। सपनों का एक सार हो तुम ही,  आधार तुम्हीं मेरे जीवन का। दिन रात सुबह हो मेरी,  तुम्ही रंग मेरे गुलशन का।

वेवफा हो तुम

वेवफा हो तुम, इसलिए नहीं कि, तुमने वादे तोड़े, बल्कि इसलिए, कि रोज चली आती हो, ख्वाबों में तड़पाने के लिए। जो तुमको जाना था, और तुम गए भी, अपनी यादें अपने सपने, क्यूं नहीं ले गए तु...

तुझे खोकर पाया खुद को

कि जब था साथ तेरा तो, नहीं कुछ पास था मेरे, तुझे खोकर के पाया है, खुद ही को साथ बस मेरे। न पूछो गम का वो आलम, कि जब तुम छोड़ भागे थे, मेरे दिल, मेरी उल्फत के, सब टूटे कच्चे धागे थे, कहीं ...

जमाने में जिसे देखो, वही बेगाना मिलता है

अफ़साना तमन्ना महफिलों की थी, मगर वीराना मिलता है। जमाने में जिसे देखो, वही बेगाना मिलता है। तुमसे दूर जाने की, कोई हसरत नही दिल में। महफ़िल मे जिसे  देखो, तेरा दीवाना मिलता है। तेरे ही पास आने को कदम बरबस हैं उठ जाते, कोई भी हर्फ़ लिखता हूँ, तेरा अफसाना मिलता है। कभी फिर मौसमों का वो हसींन मंजर नहीं देखा, तेरे बिन कब बहारों का कोई नजराना मिलता है। चले थे लड़कर दुनियां से, तेरा एक साथ पा लेंगे तू हो न साथ दिल को कब, कोई ठिकाना मिलता है। जलन दिल की नही बुझती,  सावन की हवाओं से, ये दिल जलता है हंसकर जब, कोई अनजाना मिलता है। जरा सा वक़्त बाकी है, साकी आ पिला जा फिर, शमां जब बुझती है उसपर, कहाँ परवाना मिटता है।

कभी तौबा नहीं करता

कभी तौबा नहीं करता, और सजदा भी नही करता, कभी मुझको मेरा दिलबर, रुसबा भी नहीं करता। उसके दिल की मैं समझूं, मेरे दिल की बस वो समझे, है उल्फत की रवायत एक, अदा वो भी नहीं करता। है हर पल बस यही कोशिश, कि मुझको न कोई गम हो, है उसके दिल में क्या मुझसे, बयां वो भी नहीं करता। मैं घर, दिल, आरजू से और, नजरों  से मिटा डालूं, बड़ा मासूम है पर वो, खता कोई नही करता। हजारों आरजू कह दी, मगर पल भर न वो बदला, मेरा दिल टूटता तिल तिल, सद़ा कोई नहीं करता। मोहब्बत तो उसे भी है, मगर नादान थोड़ा है, कि मेरी बाहों में आता है, अदा कोई नहीं करता।

मोहब्बत-मोहब्बत- मोहब्बत का है

मोहब्बत-मोहब्बत-मोहब्बत का है,  तेरा मेरा ये रिश्ता मोहब्बत का है, क्या जमाना कहेगा, मुझे क्यों फिकर, तू मेरा, तू मेरा, जन्म जन्मो का है। वो क्यों मान लूं, जो मुझे नापसन्द, बिन तेरे तो मुझे ये जहान नापसन्द, तू मिले न मुझे तो, जहान छोड़ दूं, बिन तेरे तो मुझे है, ख़ुदा नापसन्द। इस जहां से न डर, आसमाँ से न डर, तू मेरा, तू मेरा, जन्म जन्मो का है। डर न तु, दो कदम तो मेरे साथ चल, हाथ में मेरे देकर, तेरा हाथ चल, ये भी माना सफर ये है, उलझन भरा बन के तू हमसफ़र पार आकाश चल। है मेरे साथ तू, डर नही मौत का तू मेरा, तू मेरा, जन्म जन्मो का है। खुशनुमा हो गया, मेरा हर ख्वाब अब, बिन तेरे है नही, कोई अह्सास अब, कैसे दिल मान ले, तू हकिकत नही, मुझको रब सा है तुझपर विश्वास अब तू भले ना मिले, मैं तेरा हो गया, तू मेरा, तू मेरा, जन्म जन्मो का है। हो कोई राह, मेरी तो मंजिल है तूं, तुझे छोर कर कोई साहिल नहीं, तू ही पतवार है, और तू हीं धार है, ये भी मुमकिन, तेरे मैं हूँ, काबिल नही, पर करे क्या ये दिल, है तुझी पर फिदा, हो गया ये तेरा, जन्म जन्मो का है।  मोहब्बत-मोहब्बत- मोहब्बत का है,  तेरा मेरा ये रिश...