बिखड़ी पंखुड़ियां - 1

1.:
अपनी न को तू हाँ में बदल दिलरुबा।
मेरी चाहत पर तू भी मचल दिलरुबा
किसने बोला कि तुझमे मैं शामिल नही।
तुझपर है बस मेरा ही असर दिलरुबा।

2.:
एक मुसाफिर था मैं तो यारा, तुम्हें जो देखा भटक गया हूँ,
तुम्हारी आँखें है गहरा सागर, कश्तियां बिन उतर गया हूँ।

3.:
की जब हंसती हो तुम तो फिजाएँ गाने लगती हैं 
चमन हंसता है और घटाएं छाने लगती है।
कोई तो बात है तुममे, असर तेरा जमाने पर,
कि कलियाँ मुस्कुराती है, नजर शरमाने लगती है।


4.:
दिल सुंदर है, दिल पे लिखी,
बातों से क्या लेना मुझको।
हो साथ तुम्हारा, बहके हुए,
जज्बातों से क्या लेना मुझको।
हर सांस से आती है ये सदा, 
तुम साथ रहो अंत सांसों तक।
तुमसे मिलकर दुनियां भर के,
अहसासों से क्या लेना मुझको।

5.:
तेरी याद हमको सताए तो क्या करें,
तू रह रह कर याद आये तो क्या करें,
कुछ भी लिखता हूं, तो तेरी यादों का असर रहता है।
तू तमाम रात हमको जगाए तो क्या करें।


6.:
तेरी तस्वीर क्या देखूं, तुझे ही हमनज़र कर लूं,
तेरे गालों की लाली से जरा रंगीन मैं घर कर लूं।
तेरे बस मुस्कुराने की, अदा पर जग फिदा है ये,
मैं जग को भूल कर तुझमे, जीवन ये बसर कर लूं।

7
तेरा अंदाज़ ये दुनिया को भुला देता है,
मुझको ये रोज गुनाहगार बना देता है।
तू मेरा है नही, ये मालूम है मगर दिल में
तेरे मिलने की एक उम्मीद जगा देता है।

8.:
जो मिलन तेरे लव का मेरे लव से हो,
देखते ही बहारें भी छा जाएंगी,
तुम चली आओ बाहों में मेरे सनम,
दिल की हसरत जरा चैन पा जाएगी।

9.:
तेरे यूं मुस्कुराने से कली की याद आती है,
तू वो तो है नही लेकिन, उसी की याद दिलाती है।
मेरे दिलबर की उन्मुक्त हंसी सी है हंसी तेरी,
जिसे में भूलता हूँ तू वही अहसास जगती है।

10.:
काश कि मुझको, तेरी उल्फत की निशानी मिलती..
मेरे हिस्से में तेरी, दिलकश सी कहानी मिलती,
मैं तो कब से तेरी, चाहत के तलबगार रहा हूँ, 
काश तेरी जुल्फों तले, कोई रात सुहानी मिलती...

11.:
दूर ही से निगाहों में बात कर लेंगे,
कभी चुरायेंगे नजरें फिर चार कर लेंगे,
भरी महफिल में तेरे पास आना तो मुमकिन ही नहीं,
ख्यालों में ही तेरी सूरत से प्यार कर लेंगे।

12.:
तेरे अहसानों की हद है, रोते हैं आँसू नहीं,
दोस्तो की महफ़िल है पर, हमसा कोई तन्हा नही।

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