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हिरनी सी आंखों में देखो 274

हिरनी सी आंखों में देखो, नैना मेरे अटक गए हैं, मेरे दिल के अरमां सारे, इनमें आकर भटक गए हैं। कैसे उनको पा लेने के, दिल ने सब अरमान सजाए, कैसे उलझा दिल जुल्फों संग, बेदर्दी वो झटक गए हैं। आज अभी तक हुआ न ऐसा, जीवन में कितनों को देखा, उनको देखा बस दिल के सब, स्वप्न उन्हीं में भटक गए हैं। होठों की लाली में डूबी, लाली सारे मयखानों की, धार हुई है कुंद मय की, लब पर लब जो अटक गए हैं। नयनों ने जो बाण चलाए, उनसे बचना नामुमकिन था, इन नयनों से घायल देखो, महफिल में सब लटक गए हैं। कुछ तो था मुस्कान का जादू, और कुछ पागलपन सा मेरा, जितना चाहा बचना इनसे, इनमे ही हम भटक गए हैं। सारे गुलशन जल जाएंगे, हुस्न तुम्हारा कुछ ऐसा है, जुल्फों का उड़ना इठलाना, सावन को ये खटक गए हैं।

दिल को टुकड़ों में सजा दी मैंने 272

दिल को टुकड़ों में सज़ा दी मैंने तेरी तस्वीर घर में ही लगा ली मैंने। किस-किस की कही का क्या देता जवाब, एक चुप्पी सी मेरे होठों पर लगा ली मैंने। एक वो जो मेरे होने पर फिदा था बरसों, आज उस दर से नजरें ही फिरा ली मैंने। लौट आएगा गया वक्त मुमकिन ये नहीं, तेरी यादों की चिता कल ही जला ली मैंने। मन का तूफान रुका कब है किसी के रोके, दिल की कश्ती ही लहरों में बहा ली मैंने। मैं बिखर जाऊंगा इस बात का यकीन था उसे, उसकी नजरों से नजरें ही हटा ली मैंने। कोई आहट नही होगी मेरे दिल पर कभी, दिल में दीवार पत्थर की बना ली मैंने। शुक्रिया तेरा मुझे मुझसे मिलाया तूने, तेरे सजदे में नजरें ये झुका ली मैंने।

तरस न आया

तरस न आया पल भर उनको, सदियों की ये जुदाई  है, पल भर न बाँहों में आये,  जग से प्रीत निभाई है। तरस न आया पल भर उनको.... कुछ सपनों ने छीना सब कुछ, रिश्ते नाते, दुनिया, यारी, छीन लिए पल भर में हमसे, चीजें जो हमको थी प्यारी, जिन सपनों में जी लेने को, कालकूट विष पान किया, उन सपनों ने देखो हमसे, कैसी प्रीत निभाई है। तरस न आया पल भर उनको.... जग को सारे यकीन नहीं था, स्वर्ग प्रेम से बौना है, उसको पाना जग को खोना, उसको खो बस रोना है, चाल चली नियति ने ऐसी मन यह ठूँठ पाषाण हुआ जीत गए सब बाजी अपनी, प्रेम की बस रुसवाई है। तरस न आया पल भर उनको.... प्रबल कठिनतम वो जीवन जो, बिन तेरे उपहार मिले, सदियों तक हो विरह का रोना, जब मिले तो तेरा प्यार मिले, क्रूर समय की निर्मम गति से, जीवन खुद संताप हुआ, जिसको अमृत मान लिया था, वो जीवन ही दुहाई है। तरस न आया पल भर उनको.... जो होना वो होना ही है, किसने ये इंकारा है, नियति ही अंतिम शक्ति है, कब उसपर जोर हमारा है, करने को कुछ भी कर लो पर, समय कहीं कब ठहरा है, जीवन का मतलब तो खुद के, जीवन से ही लड़ाई है तरस न आया पल भर उनको....

असर तुम्हारा शामिल होगा

असर तुम्हारा शामिल होगा, इस तपती गर्मी में कुछ तो, मन की तपन बढ़ा देती हो, तन में अगन लगा देती हो, तुम देती हो ताप बढ़ा यूं, सारा जग ये आह है भरता, मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। भूला ना दिल सदियां बीती, होठों पर होठों का आना, नयनों का नयनों में थमना, सांसों पर सांसों का छाना, दुनिया के जो नियम थे सारे, उस पल में कुछ याद नहीं थे, हम में तुम थे तुम में हम थे, बातें थीं अल्फाज़ नहीं थे, नयनों से मधुमय एक धारा, जीवन में बिखरा देती हो मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। तन लचकाती, मन भरमाती, नयनों से मदिरा बरसाती, डाल–डाल पर फूल–फूल पर, ईर्ष्या की तुम आग लगाती, सागर लहरें, रिमझिम वर्षा, सावन मधुबन तेरी चर्चा, रोज स्वप्न में आकर देखो, मुझको तुम हो खूब सताती, कितना होगा जीवन मधुमय, हंसकर तुम बतला देती हो, मधुर मिलन मधुमास का मेरे, मन में मोह जगा देती हो। जीवन के सारे दोराहे, तुम पर आकर एक हुए हैं, भाव जो सारे बौराए थे, मिलकर तुमसे नेक हुए हैं, तुमसे नजरों का मिल जाना, तुममें दिल का खोते जाना, तुमसे मिलकर बैरंगे सब, स्वप्न मेरे रंगरेज हुए हैं, जन्मों मैं किस र...

तुम्हारे दिल में छोटा सा घर

तुम्हारा संगमरमर सा बदन मैं चूम लूं आओ, तुम्हें बांहों में लेकर के जरा मैं झूम लूं आओ, तुम्हीं तुम एक समाई हो, तुम्हें देखा है जबसे,  तुम्हारे दिल में छोटा सा, घर मैं ढूंढ लूं आओ। ये लंबी रात बहकी सी, तुम्हारा ही असर होगा, तुम्हारे जुल्फों में उलझा वो चंदा बेसबर होगा, ये देखो दिल है बेकाबू, ये अरमा भी नहीं थमते, तुम्हें दिल से लगा कर मैं, जरा सा झूम लूं आओ। तुम्हारा संगमरमर सा बदन मैं चूम लूं आओ, तुम्हें बांहों में लेकर के जरा मैं झूम लूं आओ। जुदाई का कोई सपना भी, आए न कभी मुझको, तुम्हारे बिन कोई अपना, भाए न कभी मुझको, तुम्हारी खुशबू से महके ये सांसें जन्मों-जन्मों तक तुम्हारा हाथ हाथों में, मैं लेकर चूम लूं आओ। तुम्हारा संगमरमर सा बदन मैं चूम लूं आओ, तुम्हें बांहों में लेकर के जरा मैं झूम लूं आओ। सफर कोई भी मंजिल का, बिना तेरे नहीं करना, इन होठों से जो पी ली अब, नशा कोई नही करना, ये मयखाने क्या जानेंगे, छिपा असली नशा किसमे, नशीली आंखों से पीकर इन्हीं में घूम लूं आओ। तुम्हारा संगमरमर सा बदन मैं चूम लूं आओ, तुम्हें बांहों में लेकर के जरा मैं झूम लूं आओ। कहीं ये न...

दिल में उम्मीदें पाले

दिल में उम्मीदें पाले, बैठे हैं एक किनारे, मुमकिन नहीं है सारे सपनों का सच हो पाना। होता नहीं है पूरा, कभी इंतजार दिल का, होता है पास उनके, हर रोज एक फसाना। कई दुश्मनों ने घेरी, है राह इस मिलन की, होता कभी सताना, होता किसी का आना। बड़ी मिन्नतें करो तो, अहसान हो ही जाता, बड़ी देर से है आना, जल्दी है उनको जाना। कभी इंतजार तुमको, होता तो तुम समझते, पागल सा मन ये मेरा, क्या चाहे तुम्हें बताना। इठला के बन संवर के, निकले हो तुम तो घर से, कभी बन के ऐसे हमको, करो अपना फिर दीवाना कुछ बात है कह दो, किसी चाह को न शह दो, जल्दी है मुझको उठना, ऑफिस भी तुमको जाना पल भर में कैसे भर ले, सागर जो मन का खाली, बस प्रेम बन के बरसो, कर लो यहीं ठिकाना। बड़ी देर हो गई है, बच्चे नहीं हैं सोए, सो जाओ दे के मुझको, बांहों का ये सिरहाना। अब बात कल ही करना, मुश्किल है नींद टलना, चाहो अगर जगाना, सुबह काम करके जाना। मुझे प्रेम है तुम्हीं से, मगर काम मुझको दस हैं, दिल प्यार नहीं है भुला, रिश्ते भी हैं निभाना।

ये जीवन है (भाग 22–23)

अब तक के भाग में अपने पढ़ा। रवि ऑफिस के पास ही किराए के मकान में रहने लगता है। कविता और रवि एक दूसरे का ध्यान रखते है। आखरी महीने में कविता मायके चली जाती है। दिवाली के दिन वो बहुत खुश थी और देर रात तक रवि से बात करती रही। अब आगे... दीपावली के दिन देर रात तक कविता को नींद ही नहीं आ रही थी। वो काफी देर से सोई। अगले दिन छुट्टी थी इसलिए रवि देर से सोकर उठा। 10 बज गए थे। उसने कविता को फोन इसलिए नहीं किया कि देर से सोई थी तो सोई होगी। वो तैयार कविता के पास जाने के लिए तैयार हो गया था। चाय बनाने को रख दी थी। कविता की डेट में अभी 14 दिन का समय था रवि ने पहले ही ऑफिस से उस समय की छुट्टी ले रखी थी। तभी कविता का कॉल आया। उसकी आवाज बिल्कुल थकी हुई लग रही थी। जैसे रात भर सोई न हो या बहुत दर्द हो रहा हो।  "हेलो रवि हमारा बेटा हुआ है" कविता ने बोला। "चल झूठी, जादू थोड़े ना है जो हो गया।" रवि ने हंसते हुए कहा। "सचमुच में, अभी थोड़ी देर पहले ही" कविता ने खुश होते हुए बताया। "मतलब आज अप्रैल फूल है क्या? रात को एक बजे तक तो मेरे से बात करके सोई हो। अभी उठी होगी। ओह सपने...