Posts

आओ बाहों में भर लो

आओ बाहों में भर लो, जीवन का चिर गीत तो गा दो आती जाती साँसों का वो, मुझको मधुर संगीत सुना दो। होठों को थामों आंखों से जो कहना हो कहते जाओ, कुंठित आशाओं को तुम, छू लो और परवाज़ बना दो। ऐसा हो हर ओर से तेरी, धड़कन की प्रतिध्वनि आये, जीवन के सब कोर कोर पर, एक तेरा ही रंग छा जाए, आज मिटा दो इस जीवन से, मिलने खो देने के डर को,  तुम ईश्वर बन जाओ मन के, मुझको अपना दास बना दो आती जाती साँसों का वो, मुझको मधुर संगीत सुना दो। होठों को थामों आंखों से, जो कहना हो कहते जाओ, कुंठित आशाओं को तुम, छू लो और परवाज बना दो। मधुर मिलन की ये बेताबी, बरसों से खामोश रही है, कुछ तो बात है तुममे ऐसी, जबसे देखा होश नहीं है, दुनिया पूरी पा लेने की, बिना तुम्हारे कीमत क्या है, तुमने ही भरमाया मन को, मेरा कुछ भी दोष नहीं है, प्रेम भरा आलिंगन दो फिर, जन्मों की ये प्यास बुझा दो आती जाती साँसों का वो, मुझको मधुर संगीत सुना दो। होठों को थामों आंखों से, जो कहना हो कहते जाओ, कुंठित आशाओं को तुम, छू लो और परवाज बना दो। कब गाएंगे हम तुम मिलकर कब आएगी शाम सुहानी, बाहों में कब होंगी बाहें, कब महकेगी रात की रानी। कब होगा जब...

हो तिमिर कितना भी गहरा

हो तिमिर कितना भी गहरा, आखिर भोर तो आनी ही है, कितनी घनघोर घटाएं छायें, आखिर वो छंट जानी ही है। कितने भी दीपक बुझ जाएं, आस नहीं तुम बुझने देना, सुख दुख का ही नाम है जीवन, एक आनी एक जानी ही है। नाव चलानी है ही हमको, चाहे बाढ़ या सिमटे पानी, इस धारा के पार है मंजिल, खड़ा तू कैसे है हैरानी, जीवन का मतलब है चलना, राह नहीं तो भी है डंटना, वक़्त का पहिया चलना ही है, मंजिल तो आ जानी ही है। हो तिमिर कितना भी गहरा, आखिर भोर तो आनी ही है। कितनी घनघोर घटाएं छायें, आखिर वो छंट जानी ही है। कर्मों का फल मिलके रहेगा, चाहे जितना जोर लगा ले, जैसा किया वही पायेगा, चाहे जितना भी आजमा ले, जो मिलना है यहीं मिलता है, स्वर्ग यहीं है नर्क यहीं, सत्य अमर बस है दुनिया मे, मृत्यु झूठ को आनी ही है। हो तिमिर कितना भी गहरा, आखिर भोर तो आनी ही है। कितनी घनघोर घटाएं छायें, आखिर वो छंट जानी ही है। जीवन तो बस वो ही जीता, हार नही जिसने है मानी, जीवन के सुखों दुखों को, जो समझे बस बहता पानी, जिसने आस की लौ लगाई, उसने सारी खुशियां पाईं वक़्त सभी का आता ही है, होनी तो हो जानी ही है। हो तिमिर कितना भी गहरा, आखिर भो...

रात गहरी

रात गहरी बहुत और गहरी हुई, गम के बादल छटे और न सहरी हुई, दिल के किस्से ख्यालों में अटके रहे, गम की परछाई कुछ और गहरी हुई। हाँ ख्यालात मेरे थे मदहोश से, हाँ सवालात मेरे थे खामोश से बस तेरी आरजू का, अफसाना था बस ये हालात मेरे थे बेहोश से, दिल के हालात बहके थे बहके रहे स्वप्न टूटे व्यथा मन की गहरी हुई। रात गहरी बहुत और गहरी हुई, गम के बादल छटे और न सहरी हुई। जो भी साथी बने, वो कहीं खो गए, हमसफर जो भी थे, राह में सो गए, मैं भी चलता रहा जिंदगी न थमी, आंख से निकले आंसू, स्वप्न धो गए, हर जगह मैं गया, लेके टूटा सा दिल, स्वर्ग की सारी सत्ताएं बहरी हुईं, रात गहरी बहुत और गहरी हुई, गम के बादल छटे और न सहरी हुई। वो बहुत खूब थे गुजरे तेरे जो दर, न खबर थी हमे लागी किसकी नज़र, कौन अपना था जो न गया तोड़ कर, रात होते ही दामन मेरा छोड़कर। गीत गायें भी क्या गुनगुनाएं भी क्या? मौत की शायद अंतिम अंधेरी हुई। रात गहरी बहुत और गहरी हुई, गम के बादल छटे और न सहरी हुई।

मजा

तुझको छूने के बहानो का मज़ा, कुछ तो है। रूठती तुझको, मनाने का मज़ा, कुछ तो है। हो गया दुश्मन ये जहान, छुप छुप मगर, प्यार का गीत ये गाने का मज़ा, कुछ तो है। मैं तेरे इश्क़ की राहों में चलूंगा जन्मों। जो हुई रात, शमा बनकर जलूंगा जन्मों,  अब कोई दर्द, तमन्ना, न खुशी है तुम बिन, हो तेरा साथ, जी-जी कर मरूँगा जन्मों बन गया मंदिर मेरे दिल का हर एक कोना, तुझको रब अपना बनाने का मज़ा, कुछ तो है। तुझको देखेगा तो डर जाएगा ये चांद भी आज, तुझको देखेगा तो जल जाएगा काम भी आज, तुझको पाने की तमन्ना भी जागेगी उसमे, तेरे अधरों पर मिट जाएगा ये जाम भी आज, बस ख़ुदा की ये हसीन दुनियां बचाने के लिए, तुझको दिल मे यूं छुपाने का मज़ा, कुछ तो है। आज की रात ये आई है बड़ी फुरसत से, जिंदगी आज ये मुस्काई है बड़ी फुरसत से, मैं इश्क़ का परवाना हूँ समा लो खुद में, तेरी दिल ने लौ लगाई है बड़ी फुरसत से तेरी नींदों में तुझे देखूं, तुझे प्यार करूँ, तुझको बाहों में सुलाने का मज़ा, कुछ तो है। सांझ ढले ये दुनिया सारी, जगमग दीप जला बैठी, जो मन मे मेरे बरसों से, बात वो लब पर आ बैठी, कहाँ चली अपने घूंघट में, सारे जज्बात छुपा कर के तू मेरे...

तुम्हारी आंखें

तुम्हारी आंखें तुम्हारी जुल्फें, तुम्हारी बाहों में दिल हमारा, उलझ गया है संभालूं कैसे, तुम्हारे पहलू में दिल हमारा। तराशा जिसको खुदा ने खुद ही, कि जैसे मूरत हो संगमरमर, कहीं वो खुद ही न दिल हार जाए, चुराया तुमने है दिल हमारा। नशा नशा सा छाया है बस, तुम्हारे होठों को छू लिया है, ये कैसी मय है ये कैसा जादू, मिटा तुम्हीं पर है दिल हमारा खुशबू इतनी कहाँ से लाई, बाग सारे है बहके बहके, तुमसे सहमे हैं फूल सारे, खोया तुममे है दिल हमारा। ये भोली भाली अदाएं कातिल, समझ न पाऊं क्या तेरे दिल मे, कभी लगाती गले हो मुझको, कभी तो रोता है दिल हमारा। न सांस आये, न सांस जाए, लगा लो मुझको गले से ऐसे, लब ये छू लें तुम्हारे लब यूं, थम ही जाए ये दिल हमारा। Vishu "आनन्द" 04 मार्च, 2021

आ जाओ बरस जाओ

आ जाओ बरस जाओ, तुम मुझपर घटा बनकर, क्यों प्यास बढ़ाती हो, तुम मेरी नशा बनकर। थी रात बहुत काली, तुमसे ही हुई रौशन, है थाम लिया तुमने, रोया है जब भी मन। हर सांस तुम्हीं से है, हर आस में एक तुम ही, हर चोट पर आती हो, तुम मेरी दवा बनकर। आ जाओ बरस जाओ, तुम मुझपर घटा बनकर, क्यों प्यास बढ़ाती हो, तुम मेरी नशा बनकर। थमती मेरी धड़कन को, बंसी सी जुबा दे दो, तुम मेरे ख्यालों को अम्बर तो नया दे दो। उम्मीद से ज्यादा तुम, मुझमे ही समाते हो बहलाती हो मन मेरा, तुम गीत नया बनकर। आ जाओ बरस जाओ, तुम मुझपर घटा बनकर, क्यों प्यास बढ़ाती हो, तुम मेरी नशा बनकर। होठों पर होठों को,  बाहों को बाहों में, कुछ ऐसे समाने दो, हर दूरी मिटाने दो। तुम हो जो मेरी दुनियां, हर रंग सजी देखो, ये प्रेम लुटाओ फिर, तुम मेरी वफ़ा बनकर। आ जाओ बरस जाओ, तुम मुझपर घटा बनकर, क्यों प्यास बढ़ाती हो, तुम मेरी नशा बनकर। ऐसा न हो साया ही अपना भी ये खो जाए, उम्मीद न टूटे तूँ, आये या नहीं आये, पर प्रेम के सागर का, कोई छोर नही मिलता, मुझे पार लगा जाओ, बस मांझी मेरा बनकर, आ जाओ बरस जाओ, तुम मुझपर घटा बनकर...

असर ये कैसा इश्क़ का

असर ये कैसा इश्क़ का, जलने लगी बरसात, गीली गीली धूप हुई, ठंडी ठंडी आग। शीत दुपहरी जेठ की, जले पूस की रात, गीली गीली धूप हुई, ठंडी ठंडी आग। तुमसे जब हमको हुई, प्रीत तो बदले रंग, जीवन था ये अनमना, छाई नई उमंग। कैसे तुम रंगते प्रिये, स्वप्न धवल बेरंग, हो जाती है रोशनी, छुपती काली रात। असर ये कैसा इश्क़ का, पूर्ण सभी अहसास, गीली गीली धूप हुई, ठंडी ठंडी आग। कुछ भी हो बस एक तुम्हें, पा लेने की आस, आंखों से अब न बुझे, जीवन भर की प्यास। हुई सुनहरी जिंदगी, नाचा मन का मोर, आती जाती सांस ये करती तुमको याद, असर ये कैसा इश्क़ का, हरपल तुम ही पास, गीली गीली धूप हुई, ठंडी ठंडी आग। सारे जग का रहनुमा, नाचे जैसे काठ, सबको प्रियवर श्याम मिले, न बीते ये रात, सब हो जाये श्याममय, मन नाचे मस्त मलंग, गलियाँ सारी जी उठीं, नाचें यमुना घाट। असर ये कैसा इश्क़ का, रात हुई महारास, गीली गीली धूप हुई, ठंडी ठंडी आग। मन वैरागी सा हुआ, जग को बैठा भूल, तुम लौटे न युग गया, हुई है कैसी भूल, तरसे यमुना घाट सब, बंसी की आवाज, कान्हा तुमसे दूर सभी, फूल भी लगते शूल, मिलन में भी एक दर्द ये, छूटेगा फिर साथ गीली गीली धूप है, ठंडी ठंडी...