मैं अधूरा हो गया हूँ (293)
तुम हो छोले, मैं भटूरा हो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ, बिन तुम्हारे हो गया आधा अधूरा तुम हो चटनी मैं पकौड़ा हो गया हूँ। कल सुनो, मैं भी चलूँगा साथ तेरे, हाथ में देना सजनिया, हाथ मेरे, दूर जाना है, जहाँ कोई नहीं हो, कल की छुट्टी, मैं रहूँगा साथ तेरे। हाँ वही, खट्टे-से पानी की वो पूड़ी, जिसके बिन शामें तुम्हारी, हैं अधूरी। और तीखा और खट्टे की दुहाई, मुझको भी भाने लगी है वो खटाई, हाँ तुम्हीं-सा मैं तो थोड़ा हो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ। मोमो की खुशबू में डूबी तुम खड़ी थीं, और होठों पर लगी चटनी तुम्हारी, खो गया था दिल, तुम्हें तो याद है न, जब मिली थीं तुम, मुझे वो शाम प्यारी, आज तक भुला नहीं है साथ तेरा, जब लिया हाथों में तुमने हाथ मेरा। याद है मुझको वो तेरी आँख का रंग, तेज मिर्च से था बदला गाल का रंग, मोमो की चटनी में थोड़ा खो गया हूँ, तुमसे मिलकर मैं चटोरा हो गया हूँ। बाग में हैं आज कल चर्चे तुम्हारे, जल रही हैं देख कर तुमको बहारें, इन निगाहों में छुपा कर बिजलियाँ तुम, कर रही हो पास आने के इशारे, नागिनों से पाश में ले खींचती हो, नयनों को तुम रात करके मींचती ह...