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Showing posts from April, 2019

पैमानो ने भी तौबा कर ली,

पैमानो ने भी तौबा कर ली, आंख जो तेरी पल भर देखी बहक गया मयखाना खुद ही, चाल जो तेरी चल कर देखी। रंग धवल और रूप सलोना, मचल उठा दिल का हर कोना, खुशबू तेरी, जुल्फें तेरी, बहक के यूँ महबू...

अफसाना

दिल के दर्द को भी, अफसाना समझ बैठे, हमको भी वो वक्ती, दीवना समझ बैठे। क्या हाल मेरे दिल का, कह कर तो कोई आये, खुद गैरो के संग हैं हमको, बेगाना समझ बैठे। मैं घुट कर रह गया था, जो साथ तू...

पहला प्यार (e)

तुझको शरमाते देखा नही था कभी आज तक फिर भला आज क्या हो गया, झुकती नजरों से जग है, बहकने लगा, आज किस्सा ये कैसा नया हो गया। पहले भी आती जाती थीं, गलियो से तुम, ये नज़र इस तरह तो लजाती ना थी, धडकने बढ़ गई, साँस भी चढ़ गई, क्या हुआ तुम तो कुछ भी छुपाती ना थी, क्या हुआ ये कहो, गम ना तन्हा सहो, रोग कैसा तुम्हे ये नया हो गया। झुकती नजरों से जग है, बहकने लगा, आज किस्सा ये कैसा नया हो गया। रोज आते थे तुम, छत पर पहरो मगर, आज लाली सी चहरे पर छायी है क्यूँ? जैसे सोये नही, तुम कई रात से, आंख मे नींद तेरे ये छायी है क्यूँ? लग रहा है मुझे, है ये रंग इश्क़ का, कौन दिल का तेरे है, खुदा हो गया? झुकती नजरों से जग है, बहकने लगा, आज किस्सा ये कैसा नया हो गया। आज मौसम भी बेवक़्त बदलने लगा, और कदम भी तुम्हारे बहकने लगे, ओ सखी तुम सम्भालो ये दामन तेरा, दुनियां वाले भी अब तो हैं हँसने लगे। कौन साजन तेरा मुझसे सब दे तू कह, कब से पर्दा ये हममे नया हो गया। झुकती नजरों से जग है, बहकने लगा, आज किस्सा ये कैसा नया हो गया। ebook publish   अभिव्यक्ति  सांझा काव्य संग्...

चांदनी रात में

चांदनी रात में, अधखुले नैन से, ढूँढते है तुझे, छत पर बैचैन से, दीप जलने लगे तुम कहाँ हो प्रिये, राह तकते हैं, हम कब से बैचैन से। चांदनी रात में, चांदनी रात में... सादगी का जो श्रन्गार तुमने किया, जिन्दगी को मझधार तुमने किया, इश्क़ का है ये दरिया, और डूबा हूँ मैं, निगाहो का क्या वार तुमने किया। अब करुँ क्या मै, इस दिल-ए-नादान का, खो गया ये तुझी मे प्रथम रैन से। दीप जलने लगे तुम कहाँ हो प्रिये, राह तकते हैं, हम कब से बैचैन से। चांदनी रात में, चांदनी रात में... स्वप्न मे भी कभी तुम तो आते नही, मुझको दामन मे अपने छुपाते नही, मै तो बैचैन हूँ, अपने हालात पे, क्या हुई है खता, ये बताते नही, जग है थम सा गया, चाँद नम सा गया, अब तो आती नही, नींद भी चैन से। दीप जलने लगे तुम कहाँ हो प्रिये, राह तकते हैं, हम कब से बैचैन से। चांदनी रात में, चांदनी रात में... जो बनी भी नही, उस कहानी को दिल, ढूंढता है तेरी, मेहरबानी को दिल, बढ़ गई जो बहुत पीर, बहने लगी, ढूंढता है तेरी हर निशानी को दिल, मुझसे कह दे, अगर तेरे काबिल नही, मर तो पाऊंगा, फिर मैं जरा चैन से दीप जलने लगे तुम कहाँ हो प्रिय...

अपराध

बड़े दिनो बाद आज पत्नी जी को अपने मायके जाने का मौका मिला। सच मे कोई कितना भी माजाक करे लेकिन एक महिला का प्रेम और त्याग की कोई तुलना संसार मे हो ही नही सकती। अपने घर को छोड़ कर नय...

क्या गजब हो गया

क्या गजब हो गया, देख कर के तुझे, तेरी जुल्फों से मौसम बहकने लगा। तू जो ऐसे हंसी, फूल खिलने लगे, दिल पर जादू सा कोई तो चलने लगा। बिना सावन के आंखें भिगाने लगी मुझको रह रह तेरी याद आ...

प्रकृति

जीवन शक्ति, जीवन आधार, जीवन आरम्भ, जीवन साकार। बस प्रकृति के हाथो सम्भव, मानव जीवन का उपकार। किया निरंकुश असीमित दोहन, फिर भी करती जीवन पालन जिसमे फलित हो सब आशायें, है सहनशी...